
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब वन अमले का पुलिस के साथ प्रशिक्षण करवाया जाएगा। राज्य सरकार ने वनों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए यह निर्णय किया है। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे अतिक्रमणकारियों, शिकारियों, लकड़ी चोरों और खनन व रेत माफिया से निपटने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
हाल के दिनों में सागर, खंडवा, ग्वालियर और श्योपुर जैसे कई जिलों में अतिक्रमण हटाने व अवैध उत्खनन रोकने गई वन विभाग की टीमों पर पथराव और जानलेवा हमले की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए कुशल व मजबूत बनाने के लिए ऐसा प्रशिक्षण मददगार होगा।
वन विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ (जैसे वनरक्षक, डिप्टी रेंजर) को पुलिस के साथ आत्मरक्षा, दंगा नियंत्रण और विपरीत परिस्थितियों से निपटने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बता दें, प्रदेश के वनों में अतिक्रमणकारियों व शिकारी गिरोह एक बड़ी चुनौती भी है। प्रदेश में साल दर साल अतिक्रमण बढ़ा है। पिछले वर्ष 2025 में ही 7,02,167 हेक्टेयर यानी 17,35,092.44 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण पाया गया। इनसे साबित होता है कि वन भूमि पर अतिक्रमण कर खेती के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पुलिस के साथ प्रशिक्षण दिलवाने से वन अमले को अतिक्रमणकारियों व खनन माफिया से निपटने योग्य और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। -अमित दुबे, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश वन।