
सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में खेती को लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार निजी निवेशकों के साथ मिलकर कृषि आधारित विकास मॉडल पर काम करेगी।
इसके लिए स्पेशल एग्रीकल्चर जोन विकसित किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना, उनकी फसलों को सीधे विदेश के बाजारों तक पहुंचाना और पानी की कमी वाले बुंदेलखंड में पानी व मिट्टी को बचाना है।
रियो टिंटो कंसोर्टियम समूह ने इस क्षेत्र में निवेश का प्रस्ताव दिया है। यह स्पेशल फार्मिंग जोन मॉडल पर कार्य करेगा। बुंदेलखंड क्षेत्र में उत्पादित हल्दी, अनार, अदरक, अश्वगंधा और उनसे बने उत्पादों का यूएसए, जर्मनी, जापान, सऊदी अरब, यूके, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में निर्यात किया जाएगा।
इसके लिए निर्यात समेत एक पूरी वैल्यू चेन बनाई जाएगी, यानी निजी निवेशक कंपनी बीज से लेकर फसल की कटाई, पैकेजिंग और उसे निर्यात करने की पूरी व्यवस्था खुद संभालेंगी, ताकि किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिले और अधिक दाम मिले। यह 201 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया है। कुल 10 हजार एकड़ के प्रस्तावित मॉडल में 5,500 किसानों को जोड़ा जाएगा।
बता दें कि मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और विशिष्ट फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मिट्टी, पानी, वर्षा और तापमान की अनुकूलता के आधार पर विशेष कृषि क्षेत्र (स्पेशल फार्मिंग जोन) की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके तहत ही बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि आधारित विकास कार्य किए जाएंगे।
यह भी पढ़ें- 6 साल की बच्ची पर गिरा लोहे का गेट, कमर और मुंह पर आई चोटें, स्ट्रेचर नहीं मिला तो अस्पताल में भटकते रहे पिता
बुंदेलखंड का ऐसा क्षेत्र तलाशा जा रहा है, जहां इस मॉडल को बेहतर तरीके से जमीन पर उतारा जा सके। कुल 10 हजार एकड़ के इस प्रोजेक्ट में हल्दी के लिए चार हजार एकड़ जमीन आरक्षित की जाएगी। वहीं, अश्वगंधा और अदरक उत्पादन के लिए 1500-1500 एकड़ कृषि भूमि होगी। 3000 एकड़ में अनार की खेती की जाएगी।
201 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 149 करोड़ रुपये शासकीय योजना से सहयोग और निजी/किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का योगदान रहेगा। इसमें 85 करोड़ की गैप फंडिंग को पाटने का काम सरकार करेगी, वह गरीब किसानों व एफपीओ की मदद के लिए अपनी तरफ से आर्थिक मदद करेगी।