छह हजार कंपनी संचालक से लेकर 50 हजार की मासिक आमदनी वाले तक ले रहे थे मुफ्त का राशन
Bhopal News: मध्य प्रदेश में 50 हजार से अधिक मासिक आमदनी वाले लोग भी निश्शुल्क राशन लेते रहे हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने कलेक्टरों के माध्यम से ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 01 Jan 2026 08:08:57 AM (IST)Updated Date: Thu, 01 Jan 2026 08:08:57 AM (IST)
50 हजार की मासिक आमदनी वाले तक ले रहे मुफ्त का राशन।HighLights
- जांच कराई गई तो 32 हजार ऐसे व्यक्ति पाए गए
- केंद्र सरकार ने सूची भेज सत्यापन के दिए थे निर्देश
- सभी को नोटिस देकर पात्रता पर्ची निरस्त की गई
वैभव श्रीधर, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में 50 हजार से अधिक मासिक आमदनी वाले लोग भी निश्शुल्क राशन लेते रहे हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे संदिग्ध हितग्राहियों की सूची प्रदेश सरकार को भेजी थी। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने कलेक्टरों के माध्यम से जांच कराई तो 32 हजार ऐसे व्यक्ति पाए गए, जिनकी वार्षिक आय छह लाख से अधिक निकली।
इसी तरह 143 ऐसे व्यक्ति भी राशन ले रहे थे, जो जीएसटी के दायरे में आते हैं। छह हजार कंपनी संचालक भी इसी श्रेणी में शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि कोविड 19 के समय गरीबों की सहायता के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में प्रतिमाह निश्शुल्क राशन देने की व्यवस्था लागू की थी, जो अनवरत जारी है।
5.25 करोड़ हितग्राहियों को निश्शुल्क खाद्यान्न वितरित होता है
प्रदेश के 5.25 करोड़ हितग्राहियों को निश्शुल्क खाद्यान्न वितरित किया जाता है। इस खाद्यान्न की लागत 22 हजार 600 करोड़ रुपये थी। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से खाद्य सुरक्षा कानून के तहत प्राथमिकता परिवार में शामिल करके आवेदन मिलते हैं।
चूंकि, भारत सरकार ने इसमें अधिकतम सीमा निर्धारित की हुई है, इसलिए नए नाम जुड़ नहीं पा रहे थे। ई-केवाईसी कराकर मृत, एक हितग्राही का नाम दो जगह होने, पलायन या अन्य कारण से लगभग 20 लाख हितग्राहियों के नाम हटाए गए हैं।
केंद्र सरकार ने सूची भेज सत्यापन के दिए निर्देश
वहीं, भारत सरकार ने छह लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय, जीएसटी भुगतान करने वाले और कंपनी में संचालकों की सूची भेजकर सत्यापन करने के निर्देश दिए। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने कलेक्टरों के माध्यम से जांच कराई तो 32,379 ऐसे व्यक्ति पाए गए जिनकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक है। यानी मासिक आमदनी 50 हजार रुपये है।
इसी तरह 143 वे हितग्राही चिह्नित हुए जो जीएसटी चुका रहे थे। 6,170 कंपनी संचालक भी निश्शुल्क राशन ले रहे थे। इन सभी को नोटिस देकर पात्रता पर्ची को निरस्त किया गया। अब इन्हें उचित मूल्य की दुकान से निश्शुल्क राशन नहीं मिलेगा।
हालांकि, किसी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी क्योंकि ऐसा माना जा सकता है कि जब इनके नाम पर पात्रता पर्ची जारी हुई होगी तब वे पात्रता रखते होंगे।
आयुक्त (खाद्य) कर्मवीर शर्मा का कहना है कि नाम हटाने से पहले पूरी पड़ताल की। कलेक्टरों के माध्यम से नोटिस दिए। जब यह प्रमाणित हो गया कि वे पात्रता नहीं रखते हैं, तो फिर नाम सूची से हटाकर राशन देना बंद कर दिया गया।
कितने अपात्र ले रहे थे निश्शुल्क राशन
| जिला | हितग्राही |
| इंदौर | 7561 |
| छिंदवाड़ा | 2800 |
| उज्जैन | 2632 |
| भिंड | 1932 |
| बैतूल | 1625 |
| रतलाम | 1469 |
| देवास | 1322 |
| दमोह | 1030 |
| भोपाल | 73 |
| जबलपुर | 673 |