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राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (Chief Minister Youth Entrepreneurship Scheme) के अंतर्गत बैंक ऋण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। क्रेन खरीदी के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मंडीदीप शाखा से प्राप्त 72 लाख रुपये के ऋण में यह धोखाधड़ी की गई है।
जानकारी के अनुसार, इसमें जिस क्रेन की खरीदी दिखाई गई वह एक्सिस बैंक में बंधक थी, लेकिन एनओसी नहीं ली गई। वाहन का मूल्यांकन नियमानुसार नहीं किया गया। बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और ऋण प्रभारी ने क्षेत्रीय कार्यालय की अनुमति के बिना ही कर्ज स्वीकृत कर दिया।
जांच में यह गड़बड़ियां मिलने के बाद मप्र आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने गुरुवार को एफआइआर दर्ज की है। इसमें विजय पाल सिंह परिहार, ज्ञानेंद्र सिंह असवाल, ऑल कार्गो लॉजिस्टिक लिमिटेड के संचालक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के संबंधित तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि बैंक के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक रवि चंद्र गोयल ने अक्टूबर 2021 को ईओडब्ल्यू भोपाल में शिकायत कर आरोप लगाया था कि विजय पाल सिंह परिहार, प्रोपराइटर एसबी./एसवी. इंटरप्राइजेस मंडीदीप ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत बैंक से ऋण लेने की जरूरी जानकारी छिपाई। भ्रामक जानकारी देकर धोखाधड़ी की है।
शिकायत की जांच में तथ्य सही मिलने पर एफआईआर कायम की गई है। जांच में पता चला कि योजना के अंतर्गत एसबी/एसवी इंटरप्राइजेस नामक फर्म के नाम पर 72 लाख रुपये का बैंक ऋण स्वीकृत किया गया था। दस्तावेजों के अनुसार इस फर्म का प्रोपराइटर और लाभार्थी विजय पाल सिंह परिहार को बताया गया था। यह ऋण 120 टन क्षमता की एक पुरानी ट्रक-माउंटेड क्रेन के लिए लिया गया था।
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इसके लिए 72 लाख रुपये बैंक ऋण के रूप में तथा शेष 28 लाख रुपये मार्जिन मनी के रूप में लाभार्थी पक्ष द्वारा वहन किया जाना दर्शाया गया। बैंक ट्रांजैक्शन से पता चला कि क्रेन खरीद के नाम पर बैंक से प्राप्त ऋण की राशि आल कार्गो समूह से जुड़े खाते में ट्रांसफर की गई। क्रेन का रजिस्ट्रेशन ऑल कार्गो मूवर्स इंडिया लिमिटेड के नाम पर था, जबकि भुगतान ऑल कार्गो लॉजिस्टिक लिमिटेड के खाते में किया गया।
विजय पाल सिंह परिहार पहले लियो इंजीनियरिंग सर्विस के संचालक ज्ञानेंद्र असवाल के यहां कर्मचारी के रूप में कार्य करता था। असवाल द्वारा सरकारी योजना का लाभ लेने के उद्देश्य से अपने कर्मचारी के नाम पर एसबी./एसवी. इंटरप्राइजेस नामक फर्म बनाई गई। जांच में यह भी पता चला कि जिस क्रेन को बैंक के पास गिरवी होना चाहिए था, वह लियो इंजीनियरिंग सर्विस के नाम पर पंजीकृत पाई गई। इस क्रेन को आगे टाटा फाइनेंस के पास गिरवी रख दिया गया। लोन की किस्तें समय पर जमा न होने के कारण यह खाता वर्ष 2020 के अंत में एनपीए घोषित हो गया।