
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का शिकार होने वाले पीड़ितों के लिए राहत की बड़ी खबर है। साइबर जालसाजों द्वारा ठगी गई राशि को बैंक खातों में होल्ड (बचाने) कराने की प्रक्रिया को अब और भी तेज किया जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश साइबर पुलिस मुख्यालय में 50 सीटों वाला एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जो सातों दिन 24 घंटे सक्रिय रहेगा।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस पीड़ितों से संपर्क करती है, जिसमें काफी कीमती समय बर्बाद हो जाता है। नए कॉल सेंटर के शुरू होने से प्रदेश से जुड़ी सभी शिकायतें सीधे भोपाल स्थित साइबर मुख्यालय पहुंचेंगी। इससे पुलिस को त्वरित कार्रवाई करने का मौका मिलेगा और एक विशेष टीम तत्काल बैंकों से संपर्क कर ठगी गई राशि को फ्रीज कराने का काम करेगी।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी के शुरुआती दो घंटे 'गोल्डन आवर' कहलाते हैं। यदि पीड़ित इस अवधि के भीतर हेल्पलाइन पर सूचना दे देता है, तो पुलिस के लिए पैसा होल्ड कराना आसान होता है। कॉल सेंटर में तैनात विशेष टीम न केवल पैसा होल्ड कराएगी, बल्कि पीड़ितों को वह राशि वापस दिलाने के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया और एनओसी (NOC) दिलाने में भी मदद करेगी।
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साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई के मामले में मध्य प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2024 में ठगी गई राशि होल्ड कराने के मामले में प्रदेश देशभर में 22वें स्थान पर था, जो वर्ष 2025 में छलांग लगाकर छठवें स्थान पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष प्रदेशवासियों से 581 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जिसमें से पुलिस की सक्रियता के चलते 137 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा सके।
साइबर पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इस 24x7 कॉल सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलती है, इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था से न केवल ठगी गई राशि वापस मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में भी मदद मिलेगी।