
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। ग्रामीण क्षेत्र की आबादी भूमि पर बने मकानों, दुकानों और भूखंडों की रजिस्ट्री निश्शुल्क होनी है। योजना का शुभारंभ कर दिया गया है। यह आमजन के हित की बड़ी और सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका क्रियान्वयन निर्धारित समय सीमा में सुनिश्चित कराया जाए। पटवारियों को समझाएं कि किसी पर कोई आंच नहीं आएगी। यह सरकार का काम है। यह बात मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने मंत्रालय में विभिन्न विभागों से जुड़े नीतिगत मामलों पर वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा में कही।
उधर, कर्मचारियों से जुड़े मामलों को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग को बिंदुवार तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के साथ संबंधित वरिष्ठ विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रदेश में 48 लाख से अधिक ग्रामीणों की निश्शुल्क रजिस्ट्री की जानी है। इसके लिए सरकार 3,800 करोड़ रुपये के विभिन्न शुल्क की छूट भी दे रही है। रजिस्ट्री पटवारियों को करानी है, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं है।
उनका कहना है कि रजिस्ट्री कराने पर यदि भविष्य में कोई विवाद की स्थिति बनती है तो उन्हें कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ेगा। प्रमुख सचिव रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री को बताया कि पटवारियों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि राजस्व विभाग रजिस्ट्री करा रहा है और पटवारी पदीय स्थिति में काम कर रहे हैं। इसलिए न्यायालय जाने की स्थिति ही नहीं बनेगी और यदि बनती भी है, तो सरकारी वकील पैरवी करेंगे। रजिस्ट्री में यह भी स्पष्ट उल्लेख रहेगा कि यदि छुपाकर या गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराई जाती है और मामला न्यायालय पहुंचता है तो दोषी रजिस्ट्रीधारक होगा।
उधर, बैठक में पूरक पोषण आहार वितरण व्यवस्था को लेकर बात हुई। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर वर्तमान में आंगनबाड़ियों में गर्म पोषण आहार तैयार करके देने वाले स्वसहायता समूहों को काम दिया गया है। ये ही टेक होम राशन तैयार कर रहे हैं। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रखी जाएगी, जब तक भारत सरकार पोषाहार की राशि में वृद्धि नहीं कर देती है।
अभी आठ रुपये प्रति हितग्राही के हिसाब से राशि मिलती है। इसे बढ़ाकर दस रुपये या इससे अधिक किया जाना है। यदि वर्तमान व्यवस्था में टेंडर कर दिए जाते हैं और इस बीच भारत सरकार राशि बढ़ा देती है तो फिर टेंडर पुनरीक्षित करने में समस्या होगी।
यह भी पढ़ें- एमपी में 48 लाख ग्रामीणों की फ्री रजिस्ट्री पर लगा ब्रेक! पटवारियों के विरोध से बढ़ा विवाद
कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री अलग से चर्चा करेंगे। इसमें अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, सीधी भर्ती, विभागीय जांच के साथ पेंशन के लंबित प्रकरण शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिए हैं, कि वह सभी विभागों से बिंदुवार जानकारी एकत्र करे और जो नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं, वह प्रस्तावित करे।