• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

Gandhi Jayanti Special: जब गांधीजी के लिए बच्ची ने उतार दी थी अंगूठी, भोपाल रेलवे स्टेशन का वो भावुक नजारा जो इतिहास बन गया

गांधीजी 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान ट्रेन बदलने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुछ समय रुके थे। उनके आने की सूचना शहर में फैलते ही बड़ी संख्या में लो...और पढ़ें

By Daksha VaidkarEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Fri, 02 Oct 2026 08:52:33 AM (IST)Updated Date: Fri, 02 Oct 2026 09:31:59 AM (IST)
Gandhi Jayanti Special: जब गांधीजी के लिए बच्ची ने उतार दी थी अंगूठी, भोपाल रेलवे स्टेशन का वो भावुक नजारा जो इतिहास बन गया
1929 में पहली बार भोपाल आए थे गांधीजी

HighLights

  1. 1929 में पहली बार भोपाल आए थे गांधीजी
  2. मोढ़ों की बगिया में हुआ था सम्मान
  3. तीन दिन के प्रवास में राहत मंजिल में ठहरे

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। महात्मा गांधी का भोपाल से जुड़ाव स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 1929 में बापू पहली बार भोपाल आए थे और यहां तीन दिन रुके थे। इस दौरान उन्होंने प्रार्थना सभा में हिस्सा लिया, जनसभा को संबोधित किया और मोढ़ समाज के लोगों से मुलाकात की। इसके चार साल बाद, 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान भी वे भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके और लोगों से संवाद किया। गांधीजी के इन ऐतिहासिक पड़ावों में से कुछ आज भी मौजूद हैं, लेकिन उनसे जुड़ी कई यादें समय के साथ धुंधली पड़ गई हैं।

राहत मंजिल में ठहरे थे बापू, प्रांगण में हुई थी प्रार्थना

भोपाल स्वातंत्र्य आंदोलन स्मारक समिति के संस्थापक सचिव डा. आलोक गुप्ता के अनुसार, गांधीजी 8 से 10 सितंबर 1929 तक राहत मंजिल में ठहरे थे। यह इमारत तत्कालीन नवाब के आवास अहमदाबाद पैलेस के पास स्थित थी और उस समय विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के लिए इस्तेमाल होती थी। बापू के प्रवास के दौरान इसे खादी से सजाया गया था।


9 सितंबर को यहां प्रार्थना सभा हुई, जिसमें कस्तूरबा गांधी, मीराबेन और अन्य आमंत्रित अतिथियों ने हिस्सा लिया था। गुप्ता के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद भोपाल रियासत के भारत में विलय को लेकर विचार-विमर्श के दौरान रियासत विभाग के सचिव वीपी मेनन भी इसी इमारत में ठहरे थे। बाद में राहत मंजिल को पूरी तरह ढहा दिया गया और आज उसका कोई अवशेष नहीं है।

बेनजीर मैदान में हुई थी ऐतिहासिक जनसभा

10 सितंबर 1929 को बेनजीर मैदान में गांधीजी की जनसभा हुई थी। डा. गुप्ता के मुताबिक, तत्कालीन रियासत प्रशासन उनकी यात्रा की जानकारी गोपनीय रखना चाहता था, ताकि राष्ट्रवादी कार्यकर्ता और आम लोग उनसे न मिल सकें। हालांकि, स्वतंत्रता सेनानी पं. माखनलाल चतुर्वेदी, जमनालाल बजाज और स्थानीय युवाओं के प्रयासों से सभा आयोजित हुई। पूर्व राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा भी उस सभा के प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल थे। इस मैदान का संबंध भोपाल रियासत के भारत में विलय से भी है। 1 जून 1949 को यहां पहली बार शासकीय स्तर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। डा. गुप्ता के अनुसार, यह ऐतिहासिक स्थल आज भी अपेक्षित पहचान और संरक्षण से वंचित है।

मोढ़ों की बगिया में सम्मान, हरिजन फंड के लिए दिए 501 रुपये

भोपाल प्रवास के अंतिम दिन स्टेशन लौटते समय गांधीजी इतवारा स्थित मोढ़ों की बगिया पहुंचे थे। यहां गुजराती वणिक मोढ़ समाज ने उनका सम्मान किया और हरिजन फंड के लिए 501 रुपये भेंट किए। डॉ. गुप्ता के अनुसार, इस अवसर का एक ऐतिहासिक चित्र उनके व्यक्तिगत संग्रह में सुरक्षित है। इसमें गांधीजी के साथ पं. माखनलाल चतुर्वेदी, जमनालाल बजाज सहित अन्य लोग दिखाई देते हैं। समाज ने इस यात्रा की स्मृति में परिसर में एक पट्टिका भी लगाई है।

1933 में रेलवे स्टेशन पर रुके, बच्ची ने दान की थी अंगूठी

गांधीजी 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान ट्रेन बदलने के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर कुछ समय रुके थे। उनके आने की सूचना शहर में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग स्टेशन पहुंच गए। गांधीजी ने वहां लोगों को संबोधित किया और हरिजन कार्य के लिए दान देने की अपील की। इसी दौरान एक छोटी बालिका ने अपनी अंगूठी दान कर दी थी। यह प्रसंग गांधीजी के जीवन से जुड़े रोचक घटनाक्रमों में भी दर्ज है।

पारेख ब्रदर्स की दुकान से भी जुड़ी गांधीजी की यादें

पुराने भोपाल के चौक क्षेत्र में जामा मस्जिद के पास स्थित पारेख ब्रदर्स की दुकान भी गांधीजी से जुड़ी स्मृतियां संजोए हुए है। दुकान के संचालक सुनील जय पारेख बताते हैं कि उनका परिवार करीब 350 साल पहले गुजरात से भोपाल आया था। परिवार मोढ़ समाज से जुड़ा है। उनके अनुसार, 1929 में गांधीजी के भोपाल आगमन पर उनकी दादी स्वर्गीय नगीनादेवी पारेख ने मोढ़ समाज की अन्य महिलाओं के साथ मोढ़ों की बगिया में अपने आभूषण दान किए थे।

यह भी पढ़ें- Gandhi Jayanti Special: MP से ही शुरू हुआ था गांधी युग... 28 मार्च 1918 को पहली बार इंदौर आए थे बापू, इतिहास में दर्ज हैं ये तारीखें

सुनील पारेख का दावा है कि गांधीजी उनकी दुकान पर भी आए थे और उनके परिवार के पास गांधीजी के हस्ताक्षर वाला एक पत्र आज भी सुरक्षित है। उनके दादा स्वर्गीय ईश्वरमल पारेख ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था। पारेख बताते हैं कि उनकी दुकान पर आज भी भोपाली गुटखा और पारंपरिक बटुए मिलते हैं। मोढ़ों की बगिया स्थित धर्मशाला में 30 जनवरी और 2 अक्टूबर को गांधीजी की स्मृति में प्रार्थना भी की जाती है।