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एमपी के लाखों किसानों के लिए अच्छी खबर! रबी सीजन में नहीं होगी यूरिया की किल्लत, दरों में 10% की गिरावट

मध्य प्रदेश में गेहूं, चना और सरसों जैसी मुख्य रबी फसलों की बुआई शुरू होने से ठीक पहले राज्य के लाखों किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत भरी खबर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 03:31:07 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 03:31:07 PM (IST)
एमपी के लाखों किसानों के लिए अच्छी खबर! रबी सीजन में नहीं होगी यूरिया की किल्लत, दरों में 10% की गिरावट
रबी सीजन में नहीं होगी यूरिया की किल्लत

HighLights

  1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की दरों में 10% की गिरावट
  2. MP में रबी फसलों की बुआई के दौरान नहीं होगी यूरिया किल्लत
  3. ₹242 प्रति बैग की दर रहेगी स्थिर, सब्सिडी बोझ होगा कम

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं, चना और सरसों जैसी मुख्य रबी फसलों की बुआई शुरू होने से ठीक पहले राज्य के लाखों किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। इस बार रबी सीजन के दौरान प्रदेश में यूरिया के संकट या खाद के लिए लगने वाली लंबी कतारों से किसानों को मुक्ति मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की नरमी आई है, जिसका सीधा असर देश और मध्य प्रदेश में खाद की सुचारु उपलब्धता के रूप में दिखेगा।

मध्य प्रदेश में सुचारु होगी खाद की आपूर्ति

मध्य प्रदेश में रबी सीजन के दौरान हर साल यूरिया की भारी मांग रहती है। चंबल, मालवा, नर्मदापुरम और बुंदेलखंड जैसे कृषि प्रधान अंचलों में बुआई के समय यूरिया वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिलती थी। केंद्र सरकार द्वारा इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से जारी किए गए 17 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर में इस बार कीमतें घटकर 352 से 356 डॉलर प्रति टन पर आ गई हैं, जो अगस्त में 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने और भारत को मांग से तीन गुना अधिक (करीब 53.5 लाख टन) यूरिया की पेशकश मिलने से अब मध्य प्रदेश के सभी जिलों में यूरिया का बफर स्टॉक समय पर पहुँचाना आसान हो जाएगा।

दाम रहेंगे स्थिर, सरकार को सब्सिडी में मिलेगी राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद किसानों को यूरिया बैग की दरों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि भारत में 45 किलोग्राम वाले यूरिया बैग का खुदरा मूल्य सरकार द्वारा 242 रुपये पर नियंत्रित (फिक्स) रखा जाता है।

हालांकि, वैश्विक दरें घटने का सबसे बड़ा फायदा सरकार को मिलेगा। आयात सस्ता होने से सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का आर्थिक बोझ कम होगा, जिससे मध्य प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्यों में खाद की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने और समयबद्ध वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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