
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के औद्योगिक केंद्र गोविंदपुरा से नगर निगम हर साल सात करोड़ रुपये संपत्ति कर वसूल रहा है, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधाएं देना तो दूर, सड़कों की स्ट्रीट लाइटें तक दुरुस्त नहीं की जा रहीं। उद्यमी बताते हैं कि पिछले पांच-छह साल से औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों पर लगी स्ट्रीट लाइटें बंद है। शाम ढलते ही पूरे क्षेत्र में अंधेरा पसर जाता है। निगम की इस बेरुखी से तंग आकर आखिरकार उद्यमियों को खुद मोर्चा संभाला।
गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने अपने फंड से 600 से अधिक स्ट्रीट लाइटें खरीदकर फैक्ट्रियों के सामने लगवाई हैं, ताकि कम से कम इकाइयों के आगे रोशनी रह सके। सालभर में औद्योगिक इकाइयों के भीतर 12 से 15 चोरी की वारदातें हो चुकी हैं। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिक को डर के साए में आवाजाही करने पर मजबूर हैं। कबाड़ियों के अवैध कब्जे और आदर्श नगर, गौतम नगर समेत चार झुग्गी बस्तियों के फैलाव ने स्थिति और बिगाड़ रखी है।
औद्योगिक क्षेत्र में पिछले पांच-छह साल से स्ट्रीट लाइटें बंद है। इसके चलते यहां चोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कबाड़ियों ने जगह-जगह कब्जे कर रखा है। निगम को करोड़ों का टैक्स देने के बाद भी उद्यमी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। विजय गौर, अध्यक्ष, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
हमारे पास इस संबंध में अब तक शिकायत नहीं आई है, लेकिन अब हम जांच करवाकर सभी स्ट्रीट लाइटों को जल्द से जल्द चालू करवाते हैं। अक्षय तेम्रवाल, अपर आयुक्त, निगम
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