कैबिनेट में कुर्सी सुरक्षित, पंजाब पर भी नजर... हरदीप सिंह पुरी को MP से राज्यसभा भेजने के पीछे BJP का 'गेम प्लान'
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक तीर से दो बड़े सियासी निशाने साधे हैं।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 04:11:54 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 04:11:54 PM (IST)
हरदीप सिंह पुरीHighLights
- हरदीप सिंह पुरी के कैबिनेट मंत्री बने रहने का रास्ता साफ
- एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर मिला टिकट
- पंजाब चुनाव के मद्देनजर सिख प्रतिनिधित्व को मजबूत करना लक्ष्य
डिजिटल डेस्क। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक तीर से दो बड़े सियासी निशाने साधे हैं।
- पहला - मोदी कैबिनेट के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद चेहरों में से एक को मंत्रिमंडल में सुरक्षित रखना।
- दूसरा - आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सिखों के बीच एक मजबूत और कद्दावर प्रतिनिधित्व को बनाए रखना।
संशय पर लगा विराम, कैबिनेट में बने रहने का रास्ता साफ
हरदीप सिंह पुरी का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने की ओर बढ़ रहा था। जब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी हुई और उसमें उनका नाम शामिल नहीं था, तब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई थी कि क्या पुरी संसद के उच्च सदन से बाहर हो जाएंगे?
संविधान के तहत मंत्री बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। ऐसे में पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से मध्य प्रदेश में खाली हुई राज्यसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा भाजपा के लिए मुफीद साबित हुई। पुरी को एमपी से उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने उनके कैबिनेट मंत्री बने रहने पर मुहर लगा दी है।
सिख चेहरा और पंजाब चुनाव की बिसात
भाजपा का यह कदम केवल संसदीय गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों से भी गहराई से जुड़े हैं...
- कैबिनेट में बड़ा सिख प्रतिनिधित्व: पूर्व राजनयिक रहे हरदीप सिंह पुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का सबसे प्रमुख सिख चेहरा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के रुख को रखने के साथ-साथ वे सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते आए हैं।
- पंजाब में जमीन तलाशती भाजपा: शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा पंजाब में अपने दम पर संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। राज्य में सिख मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए पार्टी को ऐसे चेहरों की जरूरत है, जिनकी छवि बेदाग, बौद्धिक और प्रभावशाली हो। हरदीप पुरी इस सांचे में पूरी तरह फिट बैठते हैं।
शहरी और पंथिक मतदाताओं को संदेश: पंजाब की राजनीति में भाजपा शहरी और मध्यम वर्ग के साथ-साथ पंथिक तबके में भी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। केंद्र सरकार में एक सिख नेता को महत्वपूर्ण और कद्दावर मंत्रालय (पेट्रोलियम) सौंपे रखना इस बात का सीधा संदेश है कि पार्टी सिख नेतृत्व को शीर्ष स्तर पर प्राथमिकता दे रही है। पूर्व राजनयिक से कुशल रणनीतिकार तक का सफर
1974 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे पुरी ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में सेवाएं दी हैं। 2014 में भाजपा में शामिल होने के बाद से वे पार्टी के लिए विभिन्न मोर्चों पर संकटमोचक की भूमिका निभाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ घरेलू ऊर्जा नीति को वैश्विक उथल-पुथल के बीच कुशलता से संभालने का श्रेय उन्हें जाता है।
मध्य प्रदेश के कोटे से उनका संसद पहुंचना यह स्पष्ट करता है कि भाजपा न केवल अपने सबसे कुशल नीति-निर्माताओं को सहेज कर रखना चाहती है, बल्कि पंजाब की भावी सियासी लड़ाई के लिए अपने प्रमुख प्यादों को भी पूरी मजबूती के साथ बिसात पर तैनात रख रही है।
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