
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। कचरा खंतियों में शहरी क्षेत्रों से लगातार पहुंच रहे कचरे के पहाड़ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 में बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारी तय की है।
मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन विभाग अगले 15 दिनों में इन जिम्मेदारियों के पालन के लिए सख्ती की तैयारी कर रहा है। नए नियमों में अब बड़ी आवासीय सोसायटी, होटल, अस्पताल, मॉल, स्कूल-कॉलेज, कारखानों और अन्य बड़े परिसरों ने अपना कचरा नहीं संभाला तो उनकी बिजली-पानी का कनेक्शन काटा जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आने वाले बड़े परिसरों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर स्वयं को पंजीकृत करना अनिवार्य होगा। उन्हें गीले और बागवानी कचरे के प्रसंस्करण की विकेंद्रीकृत व्यवस्था करनी होगी।
गीले कचरे को परिसर में ही खाद या बायोगैस बनाने में इस्तेमाल करना होगा या निजी एजेंसी से गीले कचरे का निपटारा करना होगा, ताकि इसकी बड़ी मात्रा खंतियों तक पहुंचने से रोकी जा सके। जो मौजूदा परिसर ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें स्थानीय निकाय से निर्धारित प्रमाणपत्र लेना होगा और उस कचरे के बदले निकाय को कचरे की मात्रा के अनुसार शुल्क देना होगा।
नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई भी सख्त होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले महीने एक आदेश में कहा है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले बल्क वेस्ट जनरेटर पर कार्रवाई के तहत पानी या बिजली की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की जा सकती है। अनुपालन प्रमाणपत्र के बाद इसे बहाल किया जा सकेगा।
भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त अमन मिश्रा का कहना है कि पंजीकृत परिसरों के संचालकों को इसी माह प्रशिक्षण देकर उनके कर्तव्य और नियमों की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद भी यदि किसी परिसर में नियमों का उल्लंघन मिला तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। बताया जा रहा है कि प्रदेश भर में ऐसे परिसरों की संख्या तीन हजार के करीब होगी। अब तक करीब एक हजार ने अपना पंजीयन करा लिया है।
बड़े परिसर यदि नगर निगम को अपना कचरा देते हैं तो उन्हें कचरे की मात्रा के अनुसार शुल्क देना होगा। नगर निगम की निर्धारित दरों के अनुसार, यह शुल्क आवासीय सोसायटी को 2100 रुपये प्रति टन, सरकारी विभाग और स्कूल-कॉलेज को 2400 रुपये प्रति टन और मॉल, होटल, अस्पताल व मैरिज गार्डन के लिए 2700 रुपये प्रति टन निर्धारित किया गया है।
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हालांकि, पूरी तरह अलग-अलग छांटकर दिया गया कचरा होने पर शुल्क 922 रुपये प्रति टन रहेगा, जबकि मिश्रित कचरा देने पर निर्धारित दर का 150 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
30 सितंबर तक पंजीयन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके बाद भी कोई पंजीकृत नहीं कराएगा या नियमों का उल्लंघन करोगा है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। इस बारे में निकायों को निर्देश दिए गए हैं। - शिशिर गेमावत, अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग