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जबलपुर से विदिशा तक धान पर कीटों का खतरा, फसलों पर भूरा माहू और तना छेदक का हमला, एडवाइजरी जारी

मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव और बढ़ते तापमान ने किसान और कृषि विज्ञानी, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से धान की फसल ...और पढ़ें

By Atul ShuklaEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 20 Sep 2026 07:15:49 PM (IST)Updated Date: Sun, 20 Sep 2026 07:15:49 PM (IST)
जबलपुर से विदिशा तक धान पर कीटों का खतरा, फसलों पर भूरा माहू और तना छेदक का हमला, एडवाइजरी जारी
बासमती धान की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा।

HighLights

  1. बासमती धान की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा
  2. जबलपुर संभाग में कृषि विभाग की टीमें तैनात
  3. यूरिया का अत्यधिक उपयोग न करने की अपील

अतुल शुक्ला, नईदुनिया, जबलपुर। मौसम में तेजी से हो रहे बदलाव और बढ़ते तापमान ने किसान और कृषि विज्ञानी, दोनों की चिंता बढ़ा दी है। तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से धान की फसल पर कीट और रोग का खतरा बढ़ गया है। हालात यह हैं कि जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, डिंडौरी से लेकर विदिशा समेत सभी धान उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को धान की फसल पर कीट हमला कर रहे हैं। इसको लेकर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि कृषि विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तक ने चिंता जाहिर की है।

एडवाइजरी जारी

आइसीएआर के डीडीजी और विज्ञानी लगातार जनेकृविवि और कृषि शोध संस्थान और किसानों से हालात का जायजा ले रहे हैं। इधर आनन-फानन में जनेकृविवि ने खासतौर पर बासमती धान को हो रहे नुकसान को नियंत्रित करने के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इन दिनों बढ़ते तापमान की वजह से धान में भूरा माहू, तना छेदक के साथ ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा और शीथ ब्लाइट जैसे रोगों बढ़ रहे है।


बासमती पर गुणवत्ता का खतरा

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक भूरा माहू धान के पौधे के निचले हिस्से में रहकर रस चूसता है। इसका प्रकोप बढ़ने पर खेत में जगह-जगह पौधे सूख रहे हैं, जिससे गोलाकार सूखे क्षेत्र दिखाई देने लगा हैं, जिसे विज्ञानी भाषा में हापर बर्न कहा जाता है। इसमें तना छेदक की सुंडी पौधे के तने के अंदर पहुंचकर नुकसान करती है। इससे बीच का भाग सूख जाता है और धान की बालियां निकलने के बाद उनमें दाने नहीं बनते।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दाना बनने और पकने की अवस्था में कीट या रोग का अधिक प्रकोप होने पर उत्पादन के साथ दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है। सुगंधित और बासमती किस्मों में यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बाजार में गुणवत्ता के आधार पर कीमत तय होती है। हालांकि किसी क्षेत्र में वर्तमान नुकसान का आकलन खेतों के सर्वे और नमूनों की जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

किसान अभी क्या करें?

जेएनकेविवि के वैज्ञानिक डॉ. अमित झा ने बताया कि धान में बढ़ रही बीमारी को देखते हुए सलाह दी है कि किसान नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें। पौधों के निचले हिस्से में भूरा माहू, पत्तियों का पीला पड़ना या पौधों का सूखना दिखाई देने पर तत्काल कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।

भूरा माहू का प्रकोप होने पर सलाह में डायनोटेफ्यूरान आधारित दवा अथवा स्थानीय रूप से पंजीकृत अनुशंसा के अनुसार कीटनाशक के उपयोग की बात कही गई है। छिड़काव करते समय दवा पौधे के निचले तने वाले हिस्से तक पहुंचना जरूरी है।

तना छेदक की निगरानी के लिए खेत में सूखी गोभ और सफेद बालियों वाले पौधों को देखें। आईसीएआर की सलाह में तना छेदक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप के उपयोग का भी उल्लेख है।

रोगों पर भी रखें नजर

धान में पत्तियों या तने पर ब्लास्ट, जीवाणु झुलसा और शीथ ब्लाइट के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पहचान कर उपचार किया जाना चाहिए। ब्लास्ट और शीथ ब्लाइट के लिए पंजीकृत फफूंदनाशकों के उपयोग तथा जरूरत होने पर 12 से 15 दिन बाद दोबारा छिड़काव करें।

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जनेकृविवि ने किसानों को जारी की एडवाइजरी

  • खेत में अनावश्यक रूप से पानी जमा न रहने दें।
  • यूरिया का अत्यधिक उपयोग नहीं करें।
  • खेत की नियमित निगरानी करें और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • कीट या रोग की सही पहचान के बाद ही दवा का प्रयोग करें।
  • दवा की मात्रा हमेशा लेबल और पंजीकृत कृषि अनुशंसा के अनुसार रखें।
  • छिड़काव साफ मौसम में सुरक्षा उपकरण पहनकर करें।

इन लक्षणों को देखते ही सतर्क हों

  • भूरा माहू: पौधे के निचले हिस्से में कीट, पत्तियां पीली पड़ना, पौधे सूखना और खेत में गोलाकार सूखे हिस्से बनना।
  • तना छेदक: बीच की गोभ सूखना और सफेद बालियां निकलना।
  • ब्लास्ट: पत्तियों पर विशिष्ट धब्बे और बाद में गर्दन प्रभावित होने की स्थिति।
  • शीथ ब्लाइट: पत्ती के खोल पर धब्बे बढ़ना और तने के आसपास रोग फैलना।

तापमान बढ़ने से धान में रहे रही बीमारी को देखते हुए जबलपुर समेत संभाग में जहां-जहां धान का उत्पादन होता है, वहां पर टीम भेजी जा रही है। कृषि विज्ञानियों से लगातार सलाह लेेकर किसानों तक पहुंचाई जा रही है।- के एस, नेतराम, संयुक्त संचालक, कृषि विभाग