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एमपी में अवैध कॉलोनियों की संख्या 8 हजार के पार... नकेल की तैयारी अधूरी, फाइलों में अटका नियमों में संशोधन

राजधानी सहित प्रदेशभर में अवैध कॉलोनियों का जाल फैलता जा रहा है, लेकिन अवैध कॉलोनाइजरों पर शिकंजा कसने के लिए दो साल से चल रही नियमों में संशोधन की कव...और पढ़ें

By Madanmohan malviyaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 20 Oct 2026 05:56:25 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Oct 2026 05:56:25 PM (IST)
एमपी में अवैध कॉलोनियों की संख्या 8 हजार के पार... नकेल की तैयारी अधूरी, फाइलों में अटका नियमों में संशोधन
एमपी में अवैध कॉलोनियों की संख्या 8 हजार के पार

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी सहित प्रदेशभर में अवैध कॉलोनियों का जाल फैलता जा रहा है, लेकिन अवैध कॉलोनाइजरों पर शिकंजा कसने के लिए दो साल से चल रही नियमों में संशोधन की कवायद फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई। जुलाई के विधानसभा सत्र में संशोधन विधेयक पेश करने का दावा भी अधूरा रह गया। विडंबना यह है कि जिस विभाग को अवैध कालोनियों पर लगाम लगानी है, उसके पास इनकी ताजा संख्या तक उपलब्ध नहीं है।

पुराने सर्वे में चिह्नित 7,981 कॉलोनियों के बाद व्यापक सर्वे नहीं हुआ। अब संख्या आठ हजार के पार होने का अनुमान है। उधर, वरिष्ठ सचिव समिति की आपत्तियों ने नए नियमों को फिर उलझा दिया है। नतीजा यह कि अवैध कालोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कागजों में है और जमीन पर अवैध बस्तियों का विस्तार जारी है।


प्रस्तावित कानून में ये थे प्रविधान

  • 10 साल की जेल का प्रस्ताव: अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों को अधिकतम 10 साल की सजा और पांच करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान प्रस्तावित है।
  • अफसरों की जवाबदेही तय करने की तैयारी: कलेक्टर, निगम आयुक्त, पार्षद और सरपंच सहित संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका तय करने का प्रस्ताव है।
  • डिजिटल निगरानी की योजना: ऑनलाइन रिकॉर्ड से खरीदार संपत्ति की वैधता जांच सकेंगे।
  • ध्वस्तीकरण का अधिकार: अवैध कॉलोनी हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस देने और कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित नगरीय निकाय को ध्वस्तीकरण कर जमीन अपने कब्जे में लेने का अधिकार देने का प्रविधान है।

समिति की आपत्तियों ने बढ़ाई देरी

वरिष्ठ सचिव समिति ने प्रस्तावित नियमों के कई प्रविधानों पर आपत्ति जताते हुए नए सुझाव दिए हैं। अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को इनके अनुसार मसौदे में संशोधन करना होगा। इसके बाद प्रस्ताव दोबारा समिति के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। इस बीच नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की वास्तविक संख्या भी स्पष्ट नहीं है।

ग्रामीण क्षेत्रों का पूरा आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है। सवाल यही है कि जब सरकार के पास अवैध कालोनियों का अद्यतन हिसाब ही नहीं, तो उन पर लगाम लगाने की रणनीति कितनी कारगर होगी?

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अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करने के लिए कॉलोनी सेल का गठन किया गया है। वर्तमान में किसी भी तरह की अवैध कालोनी विकसित न हो, इसके लिए सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं। नए नियमों को लेकर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है। - प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर