नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी के केरवा जलाशय के आसपास नियमों को ताक पर रखकर निर्माण और जमीन में बदलाव किए जाने के आरोपों की जांच में 19 मामले दर्ज किए गए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर गठित कमेटी ने 22 अक्टूबर को मौके पर पहुंचकर जलाशय की सीमा, फुल टैंक लेवल (एफटीएल), डूब क्षेत्र और कथित अतिक्रमणों का भौतिक सत्यापन किया।
जांच में एफटीएल के भीतर रिटेनिंग वाल, ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब, जमीन में भराव, व्यावसायिक निर्माण और बाटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर निर्माण जैसी गतिविधियां दर्ज की गईं। कमेटी के निष्कर्ष 29 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में पेश किए जाने हैं।
सीमा के निशान गायब, जलाशय के प्राकृतिक बहाव पर भी सवाल
सर्वे में कई स्थानों पर डैम की सीमा बताने वाले मुनारे यानी सीमा स्तंभ गायब मिले। मेंडोरा में जल संसाधन विभाग के रेस्ट हाउस स्थल पर जलाशय के एफटीएल के पास नए आरसीसी पिलर बनाने और इनके निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने का उल्लेख है। महुआखेड़ा में चार फरवरी 2026 के एनजीटी आदेश के बावजूद मिट्टी का भराव नहीं हटाए जाने की बात दर्ज की गई है।
मित्तूखेड़ी में जलाशय को पानी देने वाले संभावित प्राकृतिक नाले पर कंक्रीट संरचना मिलने से पानी के बहाव में बाधा की आशंका जताई गई है।कमेटी ने मेंडोरा, बरखेड़ी बाज्याफ्त, कुशलपुरा, मुल्ला जी की टेकरी और फतेहपुर डोगरा सहित विभिन्न स्थानों पर निर्माण, दीवारों और जमीन में बदलाव के मामले दर्ज किए हैं। इनमें कुछ निर्माण बाटनिकल गार्डन की जमीन और बफर या ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में बताए गए हैं।
पहले 33 मामले, अब 19 की सूची
पहले सर्वे में 33 कथित अतिक्रमण सामने आए थे। इनमें 18 सरकारी और 15 निजी जमीन पर बताए गए थे। नए सर्वे में 19 मामले दर्ज हैं। हालांकि, रिपोर्ट से यह स्पष्ट नहीं है कि पहले के 33 मामलों में से कितने दोबारा सत्यापित हुए हैं या दोनों आंकड़ों की सीधे तुलना की जा सकती है।
अब 29 अक्टूबर की सुनवाई में कमेटी की रिपोर्ट अहम होगी। सर्वे में दर्ज आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष और कार्रवाई का फैसला संबंधित प्राधिकरणों तथा एनजीटी की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सर्वे में दर्ज प्रमुख मामले
मेंडोरा: बाटनिकल गार्डन की जमीन पर रेस्टोरेंट निर्माण, एफटीएल के पास रिटेनिंग वाल और पक्के कमरे।
निशा डागा का मामला: 0.93 हेक्टेयर जमीन में भराव और निर्माण जारी होने का उल्लेख।
सूर्यवंशी बंधु: ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब दर्ज।
पीजेपी एस्टेट, बरखेड़ी बाज्याफ्त: बाटनिकल गार्डन की जमीन पर रिटेनिंग वाल और आरसीसी सड़कें।
मुल्ला जी की टेकरी: बफर/ग्रीन बेल्ट में तीन परतों वाली दीवार और बंगले का उल्लेख।
महुआखेड़ा: पुराने आदेश के बावजूद मिट्टी का भराव नहीं हटने की बात दर्ज।