भोपाल में अब निजी एजेंसियां वसूलेंगी जलकर, उपभोक्ताओं पर पड़ेगा 3 से 5 रुपये प्रति हजार लीटर का अतिरिक्त बोझ
महापौर मालती राय के अनुसार, यह व्यवस्था केवल उन्हीं कॉलोनियों में लागू होगी जहां बल्क कनेक्शन हैं और रहवासी समिति स्वेच्छा से तैयार होगी। इसके लिए नगर...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 12:59:08 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 12:59:08 PM (IST)
जल वितरण में होने वाले लीकेज और वित्तीय घाटे को रोकने के लिए ही यह नया कदम उठाया गया है। फाइल फोटो।HighLights
- जलकर वसूली के लिए निजी एजेंसियों को मंजूरी
- रहवासी समिति की सहमति से ही लागू होगी व्यवस्था
- रखरखाव और बकाया वसूली की जिम्मेदारी एजेंसी पर
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल की कॉलोनियों में पानी सप्लाई का जिम्मा संभालने और हर घर से जलकर वसूलने का काम अब नगर निगम निजी एजेंसियों को सौंपने जा रहा है। मेयर-इन-कौंसिल (एमआईसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से उपभोक्ताओं को प्रति 1000 लीटर पानी पर 3 से 5 रुपये अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।
जानिए क्या होगी नई व्यवस्था और दरें?
नई व्यवस्था के तहत नगर निगम निजी एजेंसी को 17 रुपये प्रति हजार लीटर के हिसाब से पानी उपलब्ध कराएगा। इसके बाद एजेंसी कॉलोनियों के उपभोक्ताओं से 20 से 22 रुपये प्रति हजार लीटर के हिसाब से जलकर का बिल वसूलेगी।
बीच का यह 3 से 5 रुपये का मुनाफा एजेंसी द्वारा कॉलोनी में पाइपलाइन लीकेज सुधारने, मेंटेनेंस और स्टाफ के वेतन पर खर्च किया जाएगा। खास बात यह है कि जो लोग समय पर जलकर का भुगतान नहीं करेंगे, उनके नल कनेक्शन काटने का अधिकार भी संबंधित निजी एजेंसी के पास होगा।
महापौर बोलीं- जबरन नहीं थोपी जा रही व्यवस्था, समिति की सहमति अनिवार्य
विवाद और विरोध की स्थिति को स्पष्ट करते हुए महापौर मालती राय ने कहा है कि एमआईसी में मंजूरी मिलने के बावजूद यह व्यवस्था पूरे भोपाल पर जबरन नहीं थोपी जा रही है।
यह व्यवस्था केवल उन्हीं कॉलोनियों में लागू होगी जहां बल्क कनेक्शन हैं और वहां की रहवासी समिति इसके लिए स्वेच्छा से तैयार होगी। ऐसी स्थिति में नगर निगम, रहवासी समिति और निजी एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय (तीन पक्षों का) एग्रीमेंट किया जाएगा।
यदि संबंधित रहवासी समिति इसके लिए मना कर देती है, तो उस क्षेत्र में यह व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी।
तीन श्रेणियों में बांटी गईं कॉलोनियां
जलकार्य विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग ने जानकारी दी है कि इस व्यवस्था के तहत कॉलोनियों को तीन श्रेणियों (100 मकान तक, 100 से 200 मकान, और 200 से अधिक मकानों वाली कॉलोनियां) में बांटा गया है। इस प्रक्रिया के लिए टेंडर डेढ़ महीने पहले ही किया जा चुका है।
अधिकारियों के अनुसार, कई कॉलोनियों में रहवासी समितियां पाइपलाइन का रखरखाव ठीक से नहीं कर पा रही थीं और आधे लोग ही बिल का भुगतान करते थे। जल वितरण में होने वाले लीकेज और वित्तीय घाटे को रोकने के लिए ही यह नया कदम उठाया गया है।