दीपावली से पहले भयंकर दूषित हुई भोपाल की हवा, PM-10 का स्तर 504 पहुंचा
निर्माण कार्यों की धूल और चार नवंबर से शुरू हुई सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण कचरा जमा हुआ। कई जगह कचरा जलाने से निकले धुएं ने हवा की गुणवत्ता और बिगाड़ दी। ईदगाह हिल्स में एक्यूआई 137 और टीटी नगर में पीएम-10 का अधिकतम स्तर 313 दर्ज हुआ।
Publish Date: Sun, 08 Nov 2026 10:53:51 AM (IST)Updated Date: Sun, 08 Nov 2026 10:53:51 AM (IST)
राजधानी के अवधपुरी में निर्माणकार्य के चलते उड़ती धूल।नईदुनिया।HighLights
- पर्यावरण परिसर में पीएम-10 का स्तर 504 तक पहुंचा
- कचरा और निर्माण कार्यों से बढ़ा प्रदूषण
- बच्चों और सांस के मरीजों पर ज्यादा असर की आशंका
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दीपावली से पहले ही राजधानी की हवा भयंकर दूषित हो गई है। शहर के सबसे स्वच्छ और हरित इलाकों में गिने जाने वाले पर्यावरण परिसर में ही पीएम-10 का स्तर 504 तक पहुंच गया। चिंताजनक बात यह है कि यह स्थिति दीपावली पर पटाखे चलने से पहले ही बन गई है। ऐसे में आतिशबाजी के बाद हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका है।
धूल और धुएं ने बिगाड़ी हवा की सेहत
दरअसल, शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के दौरान उड़ती धूल पहले ही शहर की हवा को खराब कर रही है। इसके साथ ही चार नवंबर से सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण कचरा संग्रहण प्रभावित रहा। तीन दिन तक सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर जमा होते रहे। उठाव नहीं होने पर कई जगह कचरे में आग लगा दी गई। इससे निकले धुएं ने हवा की स्थिति और बिगाड़ दी।
आंकड़ों में बढ़ता प्रदूषण
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निगरानी आंकड़ों के अनुसार, छह नवंबर को पर्यावरण परिसर में रात 11 से 12 बजे के बीच पीएम-10 का सब-इंडेक्स 504 दर्ज किया गया। वहीं, सात नवंबर को यहां एक्यूआई 246 रहा। इस दौरान 24 घंटे में पीएम-2.5 का अधिकतम सब-इंडेक्स 417 दर्ज हुआ।
ईदगाह हिल्स में एक्यूआइ 137 रहा, लेकिन पीएम-2.5 का अधिकतम स्तर 308 तक पहुंच गया। टीटी नगर में पीएम-10 का अधिकतम स्तर 313 दर्ज किया गया।
वहीं, दीपावली के दौरान अब पटाखों से निकलने वाला धुआं और महीन कण स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ने की आशंका है।
सांस के मरीजों को दिक्कत
वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर सांस संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। अस्थमा और सीओपीडी से जूझ रहे मरीजों को सांस फूलने, सीने में जकड़न और खांसी की समस्या के साथ ही निमोनिया का जोखिम बढ़ सकता है।
कमजोर फेफड़ों वाले मरीजों जैसे कोविड या टीबी के मरीजों को सांस लेने में परेशानी और संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को भी गले में जलन, सांस लेने में परेशानी, आंखों में खुजली और खांसी हो सकती है।- डॉ. पराग शर्मा, श्वसन रोग विशेषज्ञ