RSS में फेरबदल: MP में 7 और छत्तीसगढ़ में बनेंगे 2 संभाग; अब प्रांत के बजाय राज्य प्रचारक
अगले वर्ष मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद बदलाव प्रभावी होने का प्रस्ताव है। राज्य स्तर पर राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह की जिम्मेदारी होगी।
Publish Date: Sat, 07 Nov 2026 01:17:54 PM (IST)Updated Date: Sat, 07 Nov 2026 01:27:56 PM (IST)
फाइल फोटोHighLights
- मध्य प्रदेश में तीन प्रांतों की जगह बनेंगे सात संभाग
- छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर संभाग बनाए जाएंगे
- मार्च 2027 से लागू होगी नई व्यवस्था
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में मध्य क्षेत्र की संगठनात्मक संरचना में अगले वर्ष मार्च से बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इसके तहत मध्य भारत, महाकोशल और मालवा प्रांतों का अलग-अलग अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और इन्हें मिलाकर मध्य प्रदेश की एक राज्य इकाई बनाई जाएगी। नई व्यवस्था में प्रांत के स्थान पर राज्य प्रचारक होंगे और उनके अधीन संभागीय संगठन काम करेंगे।
मप्र में बनेंगे 7 संभाग
इस बदलाव में मध्य प्रदेश में सात संभाग अस्तित्व में आएंगे। इनमें भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, रीवा और सागर शामिल हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर दो संभाग बनाए जाएंगे। इस तरह वर्तमान मध्य क्षेत्र में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की दो राज्य इकाइयों के अंतर्गत कुल नौ संभाग होंगे। प्रत्येक संभाग में एक संभाग प्रचारक नियुक्त होगा, जो क्षेत्र प्रचारक के निर्देशन में काम करेगा।
राज्य प्रचारक के साथ राज्य कार्यवाह की भी जिम्मेदारी होगी। अगले वर्ष मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के बाद यह नई व्यवस्था प्रभावी होगी। बता दें कि संघ ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ मिलाकर मध्य क्षेत्र बनाया गया था। इंदौर में हुई संघ की कार्यकारी मंडल के बैठक में इस पर परिवर्तन पर विचार किया गया है।
प्रशासनिक इकाइयों जैसी होगी आरएसएस की संरचना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह संरचना प्रशासनिक इकाइयों की तरह ही होगी। अभी तक क्षेत्र और विभाग के बीच प्रांत का संगठन होता था, जिसे समाप्त कर दिया जाएगा। मध्य प्रदेश में संघ की दृष्टि से अभी तीन अलग-अलग प्रांत- मध्य भारत, मालवा और महाकोशल हैं।
मध्य भारत में भोपाल और नर्मदापुरम को मिलाकर भोपाल संभाग, ग्वालियर और चंबल को मिलाकर ग्वालियर संभाग प्रस्तावित किया गया है। इसी तरह, महाकोशल में जबलपुर संभाग और रीवा- शहडोल मिलाकर रीवा, बुंदेलखंड में सागर, मालवा में इंदौर और उज्जैन संभाग बनाए गए हैं।
विभाग के ऊपर होंगे संभाग
मार्च 2027 से वर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह नई व्यवस्था प्रभावी होगी। वर्तमान मध्य भारत प्रांत की जगह बनाए गए भोपाल और ग्वालियर संभाग में आठ विभाग और 31 जिले हैं। संघ की दृष्टि से प्रदेश में जिलों की संख्या 90 से अधिक है, जबकि प्रशासनिक आधार पर 55 जिले हैं।
माना जा रहा है कि संगठन की नई व्यवस्था से संघ को प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बेहतर हो सकेगा। इस व्यवस्था में संघ के सभी महत्वपूर्ण कार्य जो अभी प्रांत इकाई कर रही थी, अब संभाग करेंगे।
विभाग भी रहेंगे लेकिन उनके ऊपर संभाग होंगे। इसी अनुसार पदनाम होंगे। राज्य स्तर पर प्रदेश कार्यसमिति होगी और इसके मुखिया राज्य प्रचारक होंगे। संघ का विस्तार कार्य और समन्वय दोनों का दायित्व अलग-अलग होगा।