राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । प्रदेश में अब नए नियमों के तहत वृहद और सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उद्योगों को नवीन स्थापना और विस्तार के लिए भूमि व शेड आवंटित किए जाएंगे। आवेदकों को आवेदन के सात कार्य दिवस के भीतर ऑनलाइन सिस्टम से आशय पत्र (एलओआई या सहमति पत्र) जारी किया जाएगा।
यदि किसी परियोजना में 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश प्रस्तावित है, तो पोर्टल उसी दिन (स्वतः) आशय पत्र जारी कर देगा। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक आवास और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से जुड़ी इकाइयां भी इसके दायरे में आएंगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस
प्रदेश में उद्योग क्षेत्र को बढ़ावा देने व निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत मप्र राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2026 जारी कर दिया गया है। नए और निरस्त भूखंडों का आवंटन मुख्य रूप से ई-बिडिंग के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा।
हालांकि, 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार देने वाले मेगा प्रोजेक्ट को इससे छूट मिल सकेगी। अति प्रदूषणकारी उद्योगों को सामान्य क्षेत्रों में जगह नहीं मिलेगी, उनके लिए अलग से आरक्षित जोन तय किए गए हैं।
भूमि मूल्य निर्धारण और पट्टे की अवधि
भूमि आवंटन के लिए पट्टे की अधिकतम अवधि 99 वर्ष और भवनों के लिए 30 वर्ष तय की गई है। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में भूमि का मूल्य निर्धारण कलेक्टर गाइडलाइन पर होगा, लेकिन किसी भी स्थिति में प्रीमियम की न्यूनतम दर 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। विकसित भूमियों पर स्लैब पद्धति से 75 प्रतिशत तक की रियायत भी दी जाएगी।
वार्षिक भू-भाटक (लीज रेंट) कुल प्रब्याजी (प्रीमियम) का दो प्रतिशत देय होगा, जिसका प्रत्येक 30 वर्ष में पुनरीक्षण किया जाएगा। सुरक्षा निधि के रूप में वार्षिक लीज रेंट की तीन गुना राशि जमा करानी होगी।
अविकसित भूमि के आवंटन के लिए भूखंड के क्षेत्रफल के आधार पर आवेदन शुल्क (जीएसटी अतिरिक्त) तय होगा। वहीं विकसित भूमि में सभी इकाइयों के लिए एक समान 5,000 शुल्क निर्धारित किया गया है।
अविकसित भूमि के आवंटन आवेदन शुल्क
- 2 हेक्टेयर तक : 20,000
- 2 से 5 हेक्टेयर तक : 50,000
- 5 से 10 हेक्टेयर तक : 1,00,000
- 10 से 20 हेक्टेयर तक : 2,00,000
- 20 हेक्टेयर से अधिक : 5,00,000