डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में बड़े और ऐतिहासिक विधायी बदलाव करने जा रही है। रविवार को होने वाली जगदीशपुर कैबिनेट बैठक में पेश होने वाले 9 महत्वपूर्ण विधेयकों को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है।
1. निजी यूनिवर्सिटी खोलना हुआ आसान: 25 एकड़ जमीन की बाध्यता खत्म
सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक को हरी झंडी दी है।
- मल्टीस्टोरी प्राइवेट विवि: अब प्रदेश में मल्टीस्टोरी (बहुमंजिला) प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी खोली जा सकेंगी।
- जमीन के नियम बदले: पहले निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए कम से कम 25 एकड़ जमीन होना अनिवार्य था, जिसे अब पूरी तरह खत्म किया जा रहा है। इसकी जगह कानून में 'पर्याप्त जमीन होना' शब्द जोड़ा जा रहा है, जिससे अब कोई भी विवि शहर के भीतर या सीमा के पास भी आसानी से खुल सकेगा।
2. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: बनेगा अलग 'बिजनेस सचिवालय'
उद्योगपतियों और निवेशकों को दफ्तरों के चक्करों से बचाने के लिए 'मप्र ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026' लाया जा रहा है।
-सिंगल विंडो क्लीयरेंस: मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में एक 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) सचिवालय' खुलेगा, जहां नई इंडस्ट्री की सभी मंजूरियां सिंगल विंडो (एक ही जगह) पर मिलेंगी।
- पीसीबी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं:उद्योग लगाने के लिए अब शुरुआत में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होगी, जिसमें पहले 4-5 महीने खराब होते थे। निवेशक के हलफनामे के आधार पर ही 'लेटर ऑफ एस्टेब्लिशमेंट' जारी कर दिया जाएगा।
3. कोचिंग संस्थानों पर नकेल: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर रोक
निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी और छात्रों के तनाव को कम करने के लिए 'मप्र निजी कोचिंग संस्थान (रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन) विधेयक, 2026' लाया जा रहा है।
-उम्र सीमा तय: कोचिंग संस्थानों में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी, यानी छात्र 11वीं कक्षा से पहले कोचिंग नहीं जा सकेंगे।
-भ्रामक विज्ञापनों और फीस पर सख्ती: कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और वे भ्रामक विज्ञापन जारी नहीं कर सकेंगे। यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो संस्थान को 10 दिन के भीतर प्रो-राटा बेसिस (यथानुपात आधार) पर बची हुई फीस रिफंड करनी होगी।
4. नया फायर एक्ट: 15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य
सुरक्षा पुख्ता करने के लिए 'मप्र अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026' लाया जा रहा है।
इसके तहत 15 मीटर से ऊंची हर बहुमंजिला इमारत, 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल, 15 से ज्यादा कमरों वाले होटल, मॉल और 50 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों के लिए 'फायर एनओसी' लेना अनिवार्य होगा । उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने के साथ ही 'फायर सेफ्टी टैक्स' लगाने का भी प्रस्ताव है।
ये अहम बिल भी मानसून सत्र में होंगे पेश:
- मप्र समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026: विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार के लिए सभी धर्मों के लिए एक समान कानून होगा। लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण होगा और पैतृक संपत्ति में महिला-पुरुष को समान अधिकार मिलेगा, हालांकि जनजातियों को इससे छूट रहेगी।
- मप्र श्रम संहिता, 2026: 6 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर केंद्रीय श्रम कोड के अनुकूल नया कानून लागू होगा। इसके तहत थिएटर और रेस्टोरेंट को 24/7 (तीनों शिफ्टों में) संचालित करने की अनुमति मिलेगी।
- मप्र नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अनुरूप न्यायिक और पुलिस जांच प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया जाएगा।
- विवि का विभाजन: जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विवि को दो भागों में बांटा जा रहा है और 'मप्र धनवंतरी स्वास्थ्य विवि विधेयक' भी लाया जा रहा है।