डिजीटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और देसी गायों की नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राज्य सरकार नई योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रदेश की देसी नस्ल की गाय पालने वाले किसानों को हर महीने 900 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। सरकार की योजना 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस और भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर लॉन्च करने की है।
सालाना 40 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
योजना के शुरुआती चरण में प्रदेश के 100 प्रमुख गांवों के पांच-पांच किसानों को शामिल करने की तैयारी है। इस तरह पहले चरण में 500 किसानों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार इस योजना पर सालाना लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आगामी द्वितीय अनुपूरक बजट में आवश्यक वित्तीय प्रावधान किया जा सकता है।
15 नवंबर को योजना की शुरुआत के साथ कृषि एवं सहकारिता विभाग की ओर से राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव भी है। इसके अतिरिक्त एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम, राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन, गन्ना महोत्सव और राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन आयोजित करने की भी योजना है।
प्रदेश में देसी गायों की छह प्रमुख नस्लें
मध्य प्रदेश में गायों की छह प्रमुख देसी नस्लें पाई जाती हैं। सरकार का जोर इनके पालन को प्रोत्साहित करने और नस्लों के संरक्षण पर रहेगा।
- निमाड़ी: निमाड़ क्षेत्र के खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार जिलों में।
- मालवी: मालवा क्षेत्र के मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़ और उज्जैन में।
- केनकथा या केनवारी: बुंदेलखंड के पन्ना, छतरपुर और केन नदी के आसपास के क्षेत्रों में।
- गाओलाओ: महाराष्ट्र के विदर्भ से सटे छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट क्षेत्र में।
- महाकौशली: महाकौशल क्षेत्र के जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, सिवनी और अमरकंटक के आसपास।
- गढ़ी-खेरी: महाकौशल के आदिवासी अंचलों, विशेषकर छिंदवाड़ा, मंडला और डिंडोरी क्षेत्र में।
देसी गायों के पालन को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करने से किसानों को अतिरिक्त सहायता मिलने के साथ प्राकृतिक खेती के लिए जैविक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
गोवर्धन पूजा पर 208 वृंदावन गांवों को मिलेगा पुरस्कार
राज्य सरकार गोवर्धन पूजा के अवसर पर प्रदेश के 208 चयनित 'वृंदावन गांवों' को राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में सम्मानित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 9 नवंबर की तारीख प्रस्तावित है। इस पहल का उद्देश्य गांवों में पशुपालन और गोवंश संरक्षण को प्रोत्साहित करना है।
देसी गायों के संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ी इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि क्षेत्र में पारंपरिक पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।