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एमपी में 1 यूनिट बढ़ते ही बंद हो जाती है बिजली सब्सिडी, जानिए 150 से 151 यूनिट पर कितना बदल जाता है आपका बिल

शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल के आंकड़े बताते हैं कि बिजली खपत में केवल एक यूनिट की बढ़ोतरी कई बार पूरे बिल पर बड़ा असर डाल देती है।

By naman MishraEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 05:25:46 PM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 05:25:46 PM (IST)
एमपी में 1 यूनिट बढ़ते ही बंद हो जाती है बिजली सब्सिडी, जानिए 150 से 151 यूनिट पर कितना बदल जाता है आपका बिल
150 से 151 यूनिट पर कितना बदल जाता है आपका बिल।

HighLights

  1. 150 यूनिट बिजली खपत तक मध्य प्रदेश सरकार देती ₹606 अनुदान
  2. महज 1 यूनिट बढ़ते ही अनुदान शून्य होकर बिल तीन गुना बढ़ता है
  3. खपत नियंत्रित रखना उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल के आंकड़े बताते हैं कि बिजली खपत में केवल एक यूनिट की बढ़ोतरी कई बार पूरे बिल पर बड़ा असर डाल देती है। इसका सबसे बड़ा कारण 150 यूनिट तक मिलने वाला मध्य प्रदेश शासन का अनुदान है, जो 151 यूनिट पर समाप्त हो जाता है। यही वजह है कि 150 यूनिट तक अपेक्षाकृत कम बिल देने वाले उपभोक्ता 151 यूनिट पहुंचते ही सीधे सामान्य बिल श्रेणी में आ जाते हैं।

टेबल के अनुसार सौ यूनिट बिजली खपत पर ऊर्जा शुल्क 519 रुपये, स्थायी प्रभार 134 रुपये, विद्युत शुल्क 47 रुपये और अन्य अधिभार जोड़कर मासिक बिल 706 रुपये बनता है। इसमें शासन का 606 रुपये का अनुदान मिलने के बाद उपभोक्ता को केवल सौ रुपये का अंतिम बिल देना पड़ता है।


150 से 151 यूनिट पर सबसे बड़ा बदलाव

150 यूनिट तक मासिक बिल 1,026 रुपये बनता है, लेकिन 606 रुपये के शासन अनुदान के कारण अंतिम देय राशि 420 रुपये रह जाती है। वहीं जैसे ही खपत 151 यूनिट होती है, ऊर्जा शुल्क बढ़कर 809.55 रुपये, स्थायी प्रभार 330 रुपये और विद्युत शुल्क 82 रुपये हो जाता है। कुल मासिक बिल 1,231 रुपये बनता है, लेकिन इस स्तर पर शासन अनुदान शून्य हो जाता है।

परिणामस्वरूप उपभोक्ता को पूरे 1,231 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। वहीं दो सौ यूनिट पर ऊर्जा शुल्क 1,155 रुपये, स्थायी प्रभार 420 रुपये और विद्युत शुल्क 123 रुपये पहुंच जाता है। इससे मासिक बिल 1,711 रुपये बनता है। 250 यूनिट पर अंतिम बिल 2,199 रुपये और तीन सौ यूनिट पर 2,689 रुपये तक पहुंच जाता है। ईंधन व विद्युत क्रय समायोजन अधिभार भी खपत बढ़ने के साथ 5.76 रुपये से बढ़कर 20.65 रुपये तक पहुंच जाता है।

उपभोक्ताओं के लिए संकेत

150 यूनिट तक बिजली खपत नियंत्रित रखने पर शासन अनुदान का सीधा लाभ उपभोक्ताओं मिलता है। लेकिन 151 यूनिट पर पहुंचते ही यह राहत समाप्त हो जाती है और ऊर्जा शुल्क, स्थायी प्रभार, विद्युत शुल्क सहित सभी मदों का पूरा भार उपभोक्ताओं पर आ जाता है। ऐसे में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मासिक बिजली खपत पर निगरानी रखना आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो सकता है।

शहरी क्षेत्र में एक माह घरेलू बिजली खपत व शुल्क

मद / विवरण 100 यूनिट 150 यूनिट 151 यूनिट 200 यूनिट 250 यूनिट 300 यूनिट
ऊर्जा प्रभार (₹) 519 802.5 809.55 1155 1507.5 1860
समय आधारित विद्युत शुल्क (टीओडी) (₹) 0 0 0 0 0 0
ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (₹) 5.76 8.91 8.99 12.82 16.73 20.65
स्थायी प्रभार (₹) 134 134 330 420 510 600
विद्युत शुल्क (शासन कर) (₹) 47 81 82 123 165 208
कुल मासिक बिजली बिल (₹) 706 1026 1231 1711 2199 2689
मध्य प्रदेश शासन अनुदान (₹) -606 -606 0 0 0 0
अंतिम देय बिल (₹) 100 420 1231 1711 2199 2689

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