
राज्य ब्यूरो नईदुनिया, भोपाल। आम बजट 2026 में भारत सरकार पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर विशेष फोकस करेगी। इसमें मध्य प्रदेश के इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और ग्वालियर जैसे शहरों का सुनियोजित विकास होगा। भारत सरकार के सिटी-2, अमृत प्रोजेक्ट से स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त शहरों के साथ मेट्रोपॉलिटन सिटी विकसित की जाएगी।
इंदौर और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जबलपुर और ग्वालियर का भी मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित होने का रास्ता साफ होगा।
केंद्र सरकार ने शहरी विकास पर 95,522 करोड़ का बजट प्रविधान किया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग शहरी विकास की योजनाएं बनाकर भारत सरकार से बजट मांगेगा। मध्य प्रदेश में 35 प्रतिशत क्षेत्र शहरी हैं और 2047 तक आबादी 50 प्रतिशत से ऊपर हो जाएगी। शहरीकरण बढ़ने से विकास भी बढ़ाना पड़ेगा।
2047 तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तय किया है। यह तभी संभव है जब प्रदेश का हर शहर, गांव, परिवार और व्यक्ति विकसित और आत्मनिर्भर होगा। इस दिशा में राज्य सरकार मेट्रोपॉलिटन सिटी का कांसेप्ट लेकर आई है।
मेट्रोपालिटन रीजन एक्ट लागू कर दिया गया है अब इसके नियम बनाए जा रहे हैं। इससे भोपाल, इंदौर के साथ आसपास के छोटे नगरों व गांवों का भी सुनियोजित विकास होगा।
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मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। 99 नगर पालिकाएं (एक लाख आबादी वाली 40 नगर पालिकाएं), 298 नगर पंचायत और पांच छावनी परिषद है। इस तरह देश में मप्र सर्वाधिक 418 नगरीय निकायों वाला राज्य है। प्रदेश में तेजी से शहरीकरण हो रहा है।
मध्य प्रदेश में वर्तमान में दो करोड़ 70 लाख से ज्यादा परिवार शहरी परिधि में निवास कर रहे हैं। ऐसे में मप्र को भारत सरकार से अधिक बजट मिलने का उम्मीद है।