
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने पुरानी पड़ चुकी शहरी जल वितरण प्रणाली की कलई खोल दी है। भागीरथपुरा क्षेत्र में सीवेज और पेयजल लाइन के मिल जाने से जो स्वास्थ्य संकट खड़ा हुआ है, वह केवल इंदौर नहीं, बल्कि राजधानी भोपाल सहित राज्य के महानगरों और देश के हर उस शहर के लिए खतरे की घंटी है जो दशकों पुरानी पाइपलाइनों पर निर्भर हैं।
पुरानी लाइनें और 'क्रास-कंटामिनेशन' इंदौर की घटना का मुख्य कारण पेयजल लाइन का सीवेज लाइन का बहुत पास-पास होना और संपर्क में आना है। भोपाल और इंदौर के पुराने बसाहटों में दशकों पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं। जब पानी की आपूर्ति बंद होती है, तो पाइप में वैक्यूम बन जाता है, जो पास की सीवेज लाइन से गंदे पानी को अंदर खींच लेता है। इसे 'बैक-साइजिंग' कहते हैं।
ओडिशा के पुरी का 'ड्रिंक फ्राम टैप' मिशन जहां इंदौर इस समस्या से जूझ रहा हैं, वहीं ओडिशा का पुरी शहर भारत का पहला शहर है जिसने चौबीस घंटे सातों दिन ड्रिंक फ्राम टैप'' नल से सीधे पीने योग्य पानी के मिशन को 2021 में ही हासिल कर लिया था।
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पुरी में पानी की आपूर्ति चौबीस घंटे चालू रहती है। इससे पाइपलाइन में हमेशा 'पाजिटिव प्रेशर' बना रहता है। जब पाइप में दबाव होता है, तो बाहर का गंदा पानी या सीवेज लीकेज होने पर भी अंदर नहीं घुस सकता।
मध्य प्रदेश के शहरों को 'रुक-रुक कर पानी' देने के बजाय चौबीस घंटे सातों दिन आपूर्ति सिस्टम पर शिफ्ट होना होगा। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा का मामला है।