
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। उस दंड से किसी को क्या डर होगा जब वह प्रभावी ही नहीं हो। ऐसा ही यातायात के नियम तोड़ने वालों के साथ हो रहा है। चौराहों में लगे बड़े-बड़े कैमरे वाहन चालकों को नियमों का उल्लंघन करते रिकॉर्ड कर रहे हैं। चालान भी बन रहा है लेकिन उसकी वसूली नहीं हो पा रही।
नियम तोड़ना दूसरों के लिए भी घातक हो सकता है। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021 में 12,057 लोगों की जान गई थी, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 15,800 तक पहुंच गई। इसके बावजूद यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई और अर्थदंड की वसूली प्रभावी नहीं हो पा रही है।
प्रदेश के सात स्मार्ट सिटी में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आइटीएमएस) के माध्यम से प्रमुख चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से ई-चालान जारी किए जाते हैं, लेकिन पुलिस वाहन मालिकों से अर्थदंड वसूल नहीं पा रही है।
वर्ष 2025 और 2026 के आंकड़े बताते हैं कि 85 प्रतिशत वाहन मालिक वसूली से बचे रह जाते हैं। नियम तोड़ना उनकी आदत बन चुकी होती है। वर्ष 2018 में प्रति शहर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने के बाद भी वसूली का पुख्ता तंत्र नहीं बना है।
वर्ष 2025 में सातों शहरों में करीब 18 लाख वाहन चालकों के विरुद्ध ई-चालान जारी किए गए, लेकिन इनमें से केवल 2.15 लाख वाहन चालकों ने ही अर्थदंड जमा किया। यानी करीब 12 प्रतिशत वाहन चालकों ने ही जुर्माना भरा। राशि की बात करें तो 65 करोड़ 30 लाख रुपये के ई-चालान में से केवल आठ करोड़ 15 लाख रुपये ही जमा हो पाए। इस तरह कुल चालान राशि का लगभग 12.5 प्रतिशत ही वसूल किया जा सका।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के प्रदेश दौरे और बैठकों के बाद भी ई-चालान की वसूली की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। 30 सितंबर की स्थिति में प्रदेश के सात स्मार्ट सिटी में 11.94 लाख वाहन मालिकों के विरुद्ध ई-चालान जारी किए गए। इन पर 45.25 करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया गया था।
इसके विरुद्ध केवल 1.26 लाख वाहन मालिकों ने ही 4.78 करोड़ रुपये जमा किए। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी बकाया ई-चालान की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सख्त व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद प्रदेश में स्थिति में खास सुधार नहीं दिख रहा है।
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एडीजी पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र (पीटीआरआइ) शाहिद अबसार का कहना है कि ई-चालान की वसूली नहीं होने का एक बड़ा कारण वाहन पंजीयन के साथ मोबाइल नंबर का संबद्ध नहीं होना भी है।
कई वाहन मालिकों के मोबाइल नंबर बदल जाते हैं या परिवहन कार्यालय में दर्ज पते पर वे नहीं मिलते। ऐसे में चालान जारी होने के बाद भी संबंधित वाहन मालिक तक सूचना पहुंचाने और अर्थदंड वसूलने में परेशानी आती है।
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना।
बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना, कार में सीट बेल्ट नहीं लगाना, रेड सिग्नल तोड़ना, निर्धारित गति सीमा से तेज वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना, दोपहिया वाहन पर निर्धारित संख्या से अधिक सवारी बैठाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, वैध बीमा के बिना वाहन चलाना।