
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। जबलपुर-भोपाल-इंदौर औद्योगिक कारिडोर तीन वर्ष में मध्य प्रदेश के ग्रोथ इंजन के रूप में सामने आ जाएगा। सरकारी ढर्रे से इतर निर्णय तेजी के साथ हों, इसके लिए जो गवर्निंग काउंसिल बनेगी, उसके अध्यक्ष तो मुख्यमंत्री रहेंगे लेकिन वास्तविक कमान विशेषज्ञों के हाथ में रहेगी।
पूर्व आइएएस अधिकारी शैलेश पाठक को उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। उपाध्यक्ष को कार्यकारी अधिकार रहेंगे यानी वह क्रियान्वयन और निवेशकों की सुविधा से संबंधित निर्णय लेंगे।
प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई मोर्चों पर सरकार एक साथ काम कर रही है। नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जा रहे हैं तो वर्तमान केंद्रों पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जबलपुर-भोपाल-इंदौर कारिडोर विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इंदौर से भोपाल तक तो छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और भोपाल से जबलपुर 239 किलोमीटर का एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा।
यह केवल एक्सप्रेस-वे नहीं रहेंगे बल्कि औद्योगिक गलियारा बनेंगे। इनके आसपास औद्योगिक टाउनशिप विकसित की जानी हैं। पहले चरण में चार से पांच औद्योगिक केंद्र बनाना प्रस्तावित है, जिसमें जबलपुर और आष्टा के पास भूमि चिह्नित की गई है।
पूरा काम तेजी के साथ हो, इसके लिए जो कंपनी गठित की जा रही है, उसकी गवर्निंग काउसिंल में उपाध्यक्ष विशेषज्ञ को रखा जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य है कि प्रोफेशनल तरीके से समयबद्ध और लक्ष्य तय करके काम हो। सूत्रों का कहना है कि अभी इस जिम्मेदारी के लिए शैलेश पाठक का नाम विचार के लिए आया है।
वह मध्य प्रदेश संवर्ग के आइएएस अधिकारी थे और राज्य विभाजन के समय वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ चले गए थे। वहां अधोसंरचना विकास के क्षेत्र के काम करने के बाद नौकरी छोड़कर अधोसंरचना विकास और वित्तीय प्रबंधन वाले संस्थानों से जुड़े। उद्योग विभाग उनकी सेवाएं इस परियोजना के लिए लेने पर विचार कर रहा है।
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