मप्र में OBC आरक्षण पर सियासत तेज; जीतू पटवारी और उमंग सिंघार बोले- सरकार की मंशा में खोट, कोर्ट में कमजोर रही पैरवी
जीतू पटवारी ने कहा कि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाएगी। पटवारी और उमंग सिंघार ने सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Oct 2026 07:59:35 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Oct 2026 07:59:35 AM (IST)
जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के वकीलों को भी पैरवी में शामिल करने के सुझाव पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। फाइल फोटो।HighLights
- ओबीसी आरक्षण पर सरकार की पैरवी को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
- सरकार छह साल में आरक्षण के समर्थन में ठोस आंकड़े क्यों नहीं जुटा सकी
- ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाएगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि भाजपा सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए आवश्यक गंभीरता नहीं दिखाई। सरकार न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष और आंकड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में विफल रही। जो सरकार की मंशा और पैरवी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा की ओबीसी आरक्षण को लेकर नीतियों और कार्यप्रणाली में अंतर है।
आरक्षण मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी कांग्रेस
जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान 27 प्रतिशत आरक्षण की पहल की गई थी, भाजपा के कार्यकाल में इस दिशा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
सरकार ने नहीं माना विपक्ष का सुझाव
बता दें हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत ही रखने का निर्णय लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस के वकीलों को भी पैरवी में शामिल करने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इस सुझाव पर क्या निर्णय लिया, स्पष्ट किया जाना चाहिए।
वाेट चोरी पर सरकार चुप
उमंग सिंघार ने कहा कि देश में वोट चोरी और मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को जवाब देना चाहिए। भाजपा सरकार ने ओबीसी समाज से समर्थन तो लिया, लेकिन उनके अधिकारों की रक्षा के लिए अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।
सवाल यह है कि सरकार ने न्यायालय में ओबीसी आरक्षण के पक्ष में अपना पक्ष कितनी मजबूती से रखा। उच्च न्यायालय के आदेश का विस्तार से अध्ययन करने पर कई गंभीर सवाल सामने आते हैं।