बुधनी वन क्षेत्र अतिक्रमण मामले में बड़ा खुलासा; 78 हजार सागौन के पौधे काटकर किया गया कब्जा, सीहोर कलेक्टर ने CM को सौंपी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में जमीन खाली थी, जबकि 2022 की टाइमलाइन तस्वीरों में अतिक्रमण दिखाई दिया। सीहोर कलेक्टर ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री और मुख्य ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 09:40:14 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 09:40:14 AM (IST)
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को फोन पर जानकारी दी थी, जिसके बाद सीएम ने जांच के आदेश दिए। नईदुनियाHighLights
- कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में 78,700 सागौन पौधे काटने का दावा
- 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा किया और झोपड़ियां बनाईं
- सीहोर कलेक्टर ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपी है
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को सौंपी इस रिपोर्ट के अनुसार दूसरे जिलों से आए लोगों ने सागौन के 78,700 पौधे काटकर वन भूमि पर झोपड़ियां बना लीं थीं।
अतिक्रमण कार्रवाई के खिलाफ प्रभावित परिवार तीन दिन से वन विकास निगम के डिपो के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
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पीड़ितों से मिले शिवराज सिंह
पिछले दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय सिंह भी इस धरने में शामिल हुए थे। केंद्रीय मंत्री चौहान ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को फोन पर जानकारी दी थी, जिसके बाद सीएम ने जांच के आदेश दिए।
वन भूमि पर कब्जा
रिपोर्ट के मुताबिक, वन विकास निगम ने 2021 में भैरूंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट में 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए थे। गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों के अनुसार 2021 तक पूरा कंपार्टमेंट खाली था।
वर्ष 2022 में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों ने 78,700 पौधे काटकर अस्थायी झोपड़ियां बनाईं और खेती के लिए 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा किया।
11 अक्टूबर को कार्रवाई के दौरान हटाए गए सभी नौ कब्जाधारियों के सिंहपुर और हबीबनगर में पहले से पक्के मकान बने हुए हैं।
भैरूंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमिहीन होने का दावा करने वाले इन परिवारों के मूल गांवों में पक्के मकान हैं।
सरकार की रिपोर्ट पूरी तरह गलत है। हम वर्षों से यहां रह रहे हैं और हमारे पास सभी दस्तावेज व प्रमाण हैं। सरकार आदिवासी गरीब भाई-बहनों को परेशान कर जबरन जमीन से बेदखल कर रही है। हम भी सारे प्रमाण उपलब्ध कराएंगे। -रमेश बारेला, बारेला समाज के अध्यक्ष