MP में 5.46 लाख हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा: NGT सख्त, कहा- 'कब्जा कराने वाले अफसरों की भी तय हो जवाबदेही'
भोज वेटलैंड और जल निकायों से जुड़े मामले की सुनवाई में एनजीटी की भोपाल सेंट्रल जोन बेंच ने अतिक्रमण कराने या उसे कायम रहने देने वाले तंत्र की जवाबदेही...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 11:26:00 PM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 11:26:00 PM (IST)
फाइल फोटो।HighLights
- मध्यप्रदेश में 5,46,089.45 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण का मामला
- भोज वेटलैंड और जल निकायों से जुड़े मामले की एनजीटी की भोपाल सेंट्रल जोन बेंच में सुनवाई
- मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को विस्तृत अंतरिम कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । मध्य प्रदेश में 5,46,089.45 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सरकारी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। भोज वेटलैंड और जल निकायों में अतिक्रमण से जुड़े मामले की सुनवाई की गई।
अधिकरण ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा केवल अतिक्रमणकारी की जिम्मेदारी नहीं है, जिस अधिकारी की निष्क्रियता या लापरवाही से अवैध कब्जा कायम रहता है, उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
अवैध निर्माण को नियमित नहीं माना जा सकता
एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने एनजीटी ने राशिद नूर खान और आर्या श्रीवास्तव की याचिका पर दिए आदेश में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मार्च 2025 में प्रकाशित जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी भूमि किसी व्यक्ति या अधिकारी की पैतृक संपत्ति नहीं है। उस पर अवैध बस्ती या निर्माण की अनुमति मनमाने तरीके से नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर हुए अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता।
अधिकरण ने कहा कि सरकारी और सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तो होती है, लेकिन उन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं होती, जिनकी निष्क्रियता या लापरवाही से अतिक्रमण बढ़ता है। इससे सरकारी जमीन को नुकसान के साथ राज्य के राजस्व को भी क्षति होती है।
जिलेवार मैपिंग और सत्यापन जरूरी
एनजीटी ने अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार तंत्र और संगठित रूप से अतिक्रमण कराने वालों की जवाबदेही तय करने और सरकारी जमीन, जल निकायों और वेटलैंड के संरक्षण के लिए जिलेवार मैपिंग, स्वतंत्र सत्यापन और समयबद्ध कार्रवाई की जरूरत बताई है।
पीठ ने कहा कि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण से बचाना जरूरी है और अवैध कब्जों के नियमितीकरण को लेकर भी सावधानी बरती जानी चाहिए।
भोज वेटलैंड की सीमा तय होगी
मामले में भोज वेटलैंड और जल निकायों के सीमांकन के लिए फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और फुल रिजर्वायर लेवल (एफआरएल) के आधार पर कार्रवाई के निर्देश पहले दिए जा चुके हैं। सुनवाई में मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अंतरिम कार्रवाई रिपोर्ट पेश की और विस्तृत रिपोर्ट के लिए चार सप्ताह का समय मांगा।
इस पर अधिकरण ने अगली तारीख से पहले रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होगी।