
डिजिटल डेस्क, भोपाल। राजधानी में ट्रैफिक के दबाव को कम करने और आवागमन को सुगम बनाने के लिए एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मिसरोद से एम्प्री, चेतक ब्रिज और रत्नागिरी होते हुए अयोध्या बायपास जंक्शन तक 6-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण पर अपनी सहमति दे दी है। 2,471 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह कॉरिडोर तीन अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीएम डॉ. मोहन यादव और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की मौजूदगी में केंद्र की 'वन टाइम इंप्रूवमेंट (OTI) स्कीम' के तहत इसे हरी झंडी दी गई। वर्ष 2026-27 की योजना के तहत प्रदेश की 47 सड़कों के कायाकल्प पर कुल 4,293 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मध्य प्रदेश सरकार ने कनेक्टिविटी को नए आयाम देने के लिए केंद्र से 5 अन्य बड़े कॉरिडोर को भी शीघ्र हरी झंडी देने का अनुरोध किया है। इसमें पहला सतना-चित्रकूट 4-लेन है। 4,550 करोड़ रुपये की लागत वाले 77 किमी लंबे इस मार्ग से चित्रकूट धाम की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर: 7,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 160 किमी लंबे इस कॉरिडोर का रूट अलाइनमेंट तय हो चुका है और डीपीआर (DPR) तैयार की जा रही है।
जबलपुर-लखनादौन-रायपुर एक्सप्रेस-वे: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच व्यापार व माल ढुलाई सुगम बनाने के लिए 12,250 करोड़ रुपये की लागत से 285 किमी लंबा मार्ग प्रस्तावित है।
इंदौर ईस्टर्न बायपास (सिंहस्थ 2028): उज्जैन सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 85 किमी लंबे इस बायपास पर 9,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसे जल्द कैबिनेट मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
अटल एक्सप्रेसवे: 15,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 414 किमी लंबे इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर किसानों की सहमति के बाद अब काम शुरू करने की तैयारी है।
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फरवरी महीने में क्षतिग्रस्त हुए शाहपुरा फ्लाई-ओवर की अप्रोच रोड को लेकर केंद्रीय मंत्री ने राहत भरा फैसला लिया है। जब तक सड़क का पुनर्निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक के लिए टोल वसूली तुरंत प्रभाव से स्थगित करने पर सहमति बन गई है। 30 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार प्रस्ताव की स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा और पूर्ण यातायात बहाल होने के बाद ही टोल प्रक्रिया दोबारा लागू की जाएगी।