
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बजटीय व्यवस्थाओं और केंद्र से राशि मिलने में देरी के कारण सरकार को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 44 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान किया गया है, लेकिन अब तक विभिन्न योजनाओं में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में ढाई माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में देर से मिलने वाली राशि का उपयोग नहीं हो पाता और वह लैप्स हो जाती है। इसका सीधा असर योजनाओं की गति और लक्ष्यों की पूर्ति पर पड़ता है।
राज्य सरकार ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि योजनाओं की स्वीकृति को आगामी वित्तीय वर्ष में भी निरंतर रखा जाए, ताकि देर से जारी होने वाली राशि का उपयोग सुनिश्चित किया जा सके और बजट की कमी योजनाओं में बाधा न बने। अधिकारियों का कहना है कि फरवरी या मार्च के अंत में राशि जारी होने से उसका समय पर उपयोग संभव नहीं हो पाता।
भारत सरकार ने 13 अगस्त 2023 से एसएनए-स्पर्श (समयोजित प्रणाली एकीकृत शीघ्र हस्तांतरण) व्यवस्था लागू की है। इसके तहत आरबीआर में योजनावार खाते खोलकर राशि जारी की जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि राज्य सरकारें केंद्र से प्राप्त राशि का उपयोग अन्य कार्यों में न करें और योजनाओं के लक्ष्य पूरे हों। यह प्रणाली पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है, लेकिन वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी जटिलताओं के कारण यह व्यवस्था कई बार समस्या बन रही है।
मध्य प्रदेश को कई केंद्रीय योजनाओं की राशि अब तक नहीं मिली है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत केंद्रांश मिलने की प्रत्याशा में राज्य सरकार ने अपने कोष से राशि अग्रिम रूप से उपलब्ध करा दी, लेकिन वित्तीय वर्ष 2024-25 के 4,370 करोड़ और 2025-26 के 3,750 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं। इसी तरह जनजातीय कार्य विभाग की केंद्र प्रवर्तित छात्रवृत्ति योजनाओं में भी राज्य ने अग्रिम भुगतान किया है, जबकि भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक के 564.74 करोड़ रुपये अब तक लंबित हैं।
यह स्थिति केवल कुछ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र प्रवर्तित अन्य योजनाओं में भी यही हाल बना हुआ है। प्रदेश द्वारा 51 केंद्रीय योजनाओं को एसएनए-स्पर्श के अंतर्गत ऑनबोर्ड किया जा चुका है। इनमें से 10 योजनाओं के हितग्राहियों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रोत्साहन राशि से जुड़े प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे जा चुके हैं, लेकिन राशि प्राप्त होने में देरी बनी हुई है।
वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि केंद्रांश न मिलने का एक बड़ा कारण विभागीय स्तर पर उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर न भेजना है। इस वर्ष सभी विभागों को वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही बजट उपलब्ध करा दिया गया था। नियमों के अनुसार, जैसे-जैसे राशि का उपयोग होता जाए, वैसे-वैसे संबंधित मंत्रालयों को उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजकर अगली किश्त की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, लेकिन इसमें देरी होती है।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभागों के अधिकारियों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि भारत सरकार को उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर भेजे जाएं। जिन योजनाओं में राज्यांश की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव वित्त विभाग को समय पर दिए जाएं ताकि अनुमोदन और राशि आवंटन में विलंब न हो। प्रथम दो अनुपूरक अनुमानों में भी केंद्रीय योजनाओं के लिए राज्यांश से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता दी गई है। तृतीय अनुपूरक अनुमान, जो आगामी बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा, उसके लिए भी इसी तरह के प्रस्ताव मांगे गए हैं।