भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि। राजधानी में रविवार को ज्योतिषियों का बड़ा सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, भगवताचार्य एवं ज्योतिष विद्या से जुड़े 250 से ज्यादा विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह सम्‍मेलन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान नेहरू नगर पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक कालेज के पास आयोजित किया जा रहा है। सम्‍मेलन में विभिन्‍न ज्‍योतिषाचार्य व भगवताचार्य संस्कृति के पुनरोत्थान द्वारा अखंड भारत का निर्माण विषय पर अपने उद्बोधन प्रस्तुत करेंगे। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में अयोध्या, मथुरा, काशी, ऋषिकेश, हरिद्वार, दिल्ली, मुंबई, इंदौर, उज्जैन सहित अन्य शहरों से विद्वान आएंगे। इनके शोध पत्र रखे जाएंगे। इसमें किस पेड़ और जड़ी-बूटी का क्या महत्व है, उसके बारे में बताया जाएगा। ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल द्वारा किया जा रहा है।

कार्यक्रम के संयोजक ज्योतिषाचार्य विनोद गौतम ने बताया कि वर्तमान समय पर स्वास्थ्य एवं संस्कृति को लेकर इसके पुनरोत्‍थान को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। शहर के प्रख्‍यात ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम ने बताया कि रत्नों को भी ग्रहों से जोड़ा जाता है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। हकीकत यह है कि रत्‍नों को सिर्फ वैभव के लिए पहना जाता है। पहले तो इसे पीकदान तक में लगाया जाता था। जूतों में तक लगाया जाता रहा है। लोगों को लूटने के लिए रत्न को ग्रह से जोड़कर बताया जाता है। लोगों को भय दिखाकर लूटा जाता है। उन्होंने कहा है कि चुनौती देता हूं कि ज्योतिष में कहीं भी रत्न का जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में 90 प्रतिशत ज्योतिषी रत्न की दुकान वालों के दलाल बन गए हैं। यह बीस रूपए के कंकर को 20-20 हजार रुपए में दुकान से खरीदारी करवाते हैं। इसके बाद अपना कमीशन लेते है। पांडित गौतम ने कहा कि रत्न प्राकृतिक है, जबकि ग्रह दैवीय होते हैं। इनकी शांति पूजा-पाठ से ही संभव है।

Posted By: Ravindra Soni

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