MP में पराली जलाने पर सख्ती बेअसर, 708 घटनाओं के साथ देश में तीसरे नंबर पर प्रदेश
तीन नवंबर को प्रदेश में पराली जलाने की 94 घटनाएं दर्ज हुईं। पंजाब में 584 और राजस्थान में 100 घटनाएं सामने आईं। मप्र पराली जलाने में देश के सात राज्यों में तीसरे स्थान पर है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 02:26:55 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 02:26:55 PM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- पराली जलाने में सात राज्यों में तीसरे स्थान पर मप्र
- डेढ़ महीने में 708 जगह जलाई गई पराली
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कलेक्टरों को भेजी जानकारी
डिजीटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में पराली जलाने पर प्रतिबंध के बावजूद खेतों में फसल अवशेष जलाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। राजधानी भोपाल के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर प्रदेश के दूसरे जिलों तक खेतों में पराली के ढेर जलाए जा रहे हैं। इससे उठने वाला धुआं वातावरण में प्रदूषण बढ़ा रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा कर रहा है।
खेतों में आग लगाने की घटनाएं यह सवाल भी खड़ा कर रही हैं कि प्रतिबंध और जुर्माने के प्रविधान के बावजूद उन पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।
भोपाल के 11 मील क्षेत्र के आसपास मंगलवार दोपहर भी खेतों में पराली जलाने के कई मामले सामने आए। धान की कटाई और गहाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को एक जगह इकट्ठा कर आग लगाई जा रही है। थ्रेसर से धान निकालने के बाद किसान पराली के ढेर जला रहे हैं। इससे उठने वाला धुआं आसपास के रिहायशी क्षेत्रों और सड़कों तक फैल रहा है।
पराली जलाने में सात राज्यों में तीसरे स्थान पर मप्र
दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) की ओर से सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार रिपोर्ट के अनुसार, तीन नवंबर को मध्य प्रदेश में पराली जलाने की 94 घटनाएं दर्ज की गईं। इस मामले में प्रदेश सात राज्यों में तीसरे स्थान पर रहा। पंजाब में सबसे अधिक 584 और राजस्थान में 100 घटनाएं दर्ज की गईं।
वहीं, 15 सितंबर से तीन नवंबर 2026 के बीच मध्य प्रदेश में पराली जलाने की कुल 708 घटनाएं सामने आईं। इस अवधि में भी पंजाब 2196 और राजस्थान 838 घटनाओं के साथ प्रदेश से आगे रहे। हालांकि, पिछले आंकड़ों की तुलना में मध्य प्रदेश में घटनाओं की संख्या कुछ कम हुई है, लेकिन बड़े पैमाने पर पराली जलाया जाना चिंता का विषय बना हुआ है।
उपग्रहों से मिलती है जानकारी, कार्रवाई की जिम्मेदारी कलेक्टरों पर
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर (ईआरसी) से जुड़े प्राचीर दीक्षित के अनुसार, बोर्ड की भूमिका मुख्य रूप से नासा और इसरो के उपग्रहों से मिलने वाले आंकड़ों को एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने तक सीमित है। उपग्रहों में लगे हीट सेंसर खेतों में आग लगने की घटनाओं का पता लगाते हैं। इसके बाद संबंधित आंकड़े जिला कलेक्टरों को भेजे जाते हैं। आगे की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है।
दीक्षित ने बताया कि खेतों में आग की घटनाओं को रोकने और प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए मैदानी स्तर पर काम किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से जवाब नहीं मिला।
कानून के बावजूद नहीं थम रहा पराली जलाने का सिलसिला
प्रदेश में फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए कानून और आर्थिक दंड के प्रावधान हैं। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं निगरानी और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता खराब करता है और आसपास रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ाता है।