
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में लापरवाही पर आठ निर्माण एजेंसियां ब्लैक लिस्टेड की जाएंगी। इन कार्यों से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। 29 कार्यों में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के एमडी भरत यादव ने लोक निर्माण विभाग के सड़क एवं पुल के 21 कार्य, परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआइयू) के छह भवन निर्माण कार्य और एमपीआरडीसी के सात कार्य तथा मप्र भवन विकास निगम (एमपीबीडीसी) से संबंधित एक कार्य में लापरवाही पर यह कार्रवाई की है।
दरअसल, पांच जून को मुख्य अभियंताओं के सात विशेष निरीक्षण दलों ने रायसेन, सिवनी, दतिया, बड़वानी, शहडोल, रतलाम एवं पन्ना जिलों में निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुके कार्यों का निरीक्षण किया था। इसमें कुल 35 निर्माण कार्यों का चयन कर उनकी गुणवत्ता, प्रगति, तकनीकी मानकों एवं रखरखाव की स्थिति का परीक्षण किया गया।
एमडी भरत यादव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से निरीक्षण दलों द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों की विस्तृत समीक्षा की। यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही, निम्न गुणवत्ता अथवा अनुबंधीय शर्तों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यादव ने कहा कि पूर्व में किए गए औचक निरीक्षणों के प्रतिवेदनों में उल्लेखित सभी कमियों का निराकरण अगली समीक्षा बैठक से पूर्व अनिवार्य रूप से किया जाए। प्रत्येक निरीक्षण प्रतिवेदन पर की गई कार्रवाई की अलग से समीक्षा की जाएगी और लंबित मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में वर्ष 2026 के लिए निर्धारित लोक कल्याण सरोवरों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति 30 जून तक सुनिश्चित की जाए तथा निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए।
भरत यादव ने कहा कि आगामी वर्षाकाल को देखते हुए प्रदेश के सभी जिलों में पुल-पुलियों के मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने तथा सड़कों पर गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करें। वर्षा के दौरान नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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सभी जलमग्नीय पुलों पर चेतावनी संकेतक बोर्ड, जलस्तर संबंधी जानकारी एवं आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1099 का स्पष्ट प्रदर्शन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्राप्त शिकायतों का केवल औपचारिक निराकरण न किया जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को समाधान की जानकारी देकर उसकी संतुष्टि सुनिश्चित की जाए।