
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आयुष्मान योजना में संबद्ध निजी अस्पतालों की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के अनुबंधित अस्पताल मेडिसिन के पैकेज में रोगियों का उपचार तभी कर पाएंगे, जब उनके पास नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल्स (एनएबीएच) का अंतिम प्रमाण पत्र होगा। साथ ही अन्य पैकेज में संबद्धता के लिए भी कम से कम एंट्री लेवल एनएबीएच जरूरी किया जाएगा।
एक अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इसके पहले भी स्वास्थ्य विभाग ने एक अप्रैल से यह शर्त निर्धारित की थी, पर अस्पताल संचालकों ने मुख्यमंत्री से मिलकर मोहलत देने की मांग की थी। इसके बाद छह माह का समय दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब समय सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। ऐसे में मेट्रो शहर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लगभग 250 अस्पताल योजना से बाहर हो जाएंगे। हालांकि, इस निर्णय के बाद उन अस्पतालों ने एंट्री लेवल एनएबीएच के लिए प्रयास तेजी से प्रारंभ कर दिया है, जिनके पास योजना के अंतर्गत पैकेजों की संख्या अधिक है और मरीज भी ज्यादा हैं।
हालांकि, शर्त के अनुसार इन्हें छह माह के भीतर फाइनल एनएबीएच प्राप्त करना होगा। मेट्रो के अतिरिक्त अन्य जिलों के लिए एनएबीएच अनिवार्य नहीं किया जा रहा है, पर यह प्रमाणीकरण कराने वालों को संबद्धता देने की शर्तों में ढील दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर 50 बिस्तर या अधिक का अस्पताल होने पर सीएमएचओ की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें मान्यता दी जा सकेगी।
बता दें कि प्रदेश में वर्तमान में 816 निजी अस्पताल अनुबंधित हैं, जिनमें 465 यानी 57 प्रतिशत मेट्रो शहरों में हैं। उधर, प्रदेश में 90 ब्लॉक ऐसे हैं जहां एक भी निजी अस्पताल योजना में अनुबंधित नहीं है। ऐसे ब्लॉकों में अस्पतालों को शर्तों में कुछ छूट दी जाएगी।
एक नर्सिंग होम संचालक ने बताया कि एनएबीएच कराने के लिए पांच लाख रुपये का शुल्क है। निरीक्षकों के आने-जाने और ठहरने का खर्च अस्पताल को उठाना पड़ता है। इससे भी बड़ा खर्च यह कि एनएबीएच के मापदंड के अनुसार कर्मचारियों की संख्या, रिकॉर्ड का संधारण, उपकरण, बिस्तरों की संख्या रखनी होती है। ऐसे में लगभग 50 बिस्तर के अस्पताल पर प्रतिवर्ष करीब 40 लाख रुपये खर्च आता है।
अस्पताल संचालकों का कहना है कोरोना के बाद हर सामग्री की दरें करीब 25 प्रतिशत बढ़ गई हैं, पर आयुष्मान भारत योजना के पैकेज की दरों में वृद्धि नहीं की गई है। उल्टा, कुछ में कमी कर दी गई है।
उदाहरण के तौर पर डायलिसिस के एक साइकिल के 2250 रुपये मिलते थे जो अब एनएबीएच अस्पताल के लिए 1485 रुपये और गैर एनएबीएच के लिए 1350 रुपये है। अस्पतालों को भुगतान तीन से चार माह की देरी से किया जा रहा है। नर्सिग होम संचालकों का यह भी तर्क है कि मात्र चार शहरों के लिए ही शर्त क्यों रखी जा रही है। बाकी जगह प्रभावी क्यों नहीं किया जा रहा है।
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भोपाल -- 228
इंदौर -- 90
ग्वालियर -- 79
जबलपुर -- 68
एनएबीएच के अतिरिक्त भी गुणवत्ता के लिए कई विकल्प हैं। क्यूसीआइ-सीजीएचएस को विकल्प के रूप में रखा जा सकता है। एनएबीएच प्रमाणीकरण कराने के लिए अस्पताल में संसाधन बढ़ाने पड़ते हैं, जिसमें कम से कम 40 लाख रुपये प्रतिवर्ष खर्च आता है। अन्य किसी राज्य में अनिवार्यता नहीं है। डा. संजय गुप्ता अध्यक्ष नर्सिंग होम एसोसिएशन, भोपाल ब्रांच