
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एमपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MPMRC) में छंटनी का दौर शुरू हो चुका है और इसके पीछे के कारणों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं । अब तक कुल नौ कर्मचारियों को हटाया जा चुका है । इनमें दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) से आए छह कर्मचारियों को उनके मूल विभाग वापस भेज दिया गया है, जबकि एमपी मेट्रो के तीन कर्मचारियों की सेवाएं पूरी तरह समाप्त कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक यह छंटनी ऑपरेशन, मेंटेनेंस और डिजाइन सेक्शन से की गई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, उनके सेवा समाप्ति पत्रों में किसी भी प्रकार का कारण दर्ज नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों के बीच असमंजस और डर का माहौल बन गया है । एमपी मेट्रो रेल कॉरर्पोरेशन में कुल 400 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से इन हाउस 250 अधिकारी-कर्मचारी हैं। 150 कर्मचारी आउट सोर्स के जरिए रखे गए हैं।
मेट्रो प्रबंधन इसे खर्च कम करने की सर्जरी बता रहा है, लेकिन अंदर चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है । सूत्रों का दावा है कि एमपी मेट्रो में नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां हुई हैं। इन्हीं नियुक्तियों की परतें खुलने के बाद माहौल गरमाया हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर फर्जी नियुक्ति का आरोप है, उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मेट्रो प्रबंधन ने एक-डेढ़ दर्जन और कर्मचारियों को हटाने की सूची तैयार कर रखी है। वहीं हाल ही में हटाए गए एक कर्मचारी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसका जवाब मेट्रो प्रबंधन के विधि विभाग को देना है। इसके चलते जिन अधिकारियों की नियुक्तियों और निर्णयों पर सवाल हैं, उन पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि एक सीनियर अधिकारी को हटाया गया है, जिनका नाम कुछ समय पहले हटाए गए एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी से जोड़ा जा रहा है । चर्चा है कि इसी अधिकारी के कार्यकाल में गलत तरीके से कई भर्तियां की गई थीं और कुछ आर्थिक गड़बड़ियां भी सामने आई थीं। हालांकि, मेट्रो प्रबंधन के आला अधिकारी पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
जरूरत के हिसाब से कर्मचारी रखे और हटाए जाते हैं। जरूरत खत्म हो गई। इसलिए कुछ कर्मचारियों को हटाया।- एस. कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो रेल कॉरर्पोरेशन