
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में 21 साल बाद नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के साथ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की गई है। इसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में चरणबद्ध तरीके से 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इसमें पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है। नागरिकों को भ्रामक जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय से कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग में कही।
उन्होंने अधिकारियों को जिलों में बस स्टैंड, डिपो, स्टॉप और ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के भी निर्देश दिए। बैठक में सीएम ने अधिकारियों से कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं।
कलेक्टर टाइम लिमिट (टीएल) बैठक में भी प्रत्येक सप्ताह क्षेत्रीय कंपनी के कार्यपालक निदेशक से चर्चा करें। राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतीकरण और सुझाव प्राप्त करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पुराने और बंद पड़े बस डिपो या टर्मिनल में स्वच्छता अभियान चलाकर जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएं। जिन स्थानों पर बस स्टैंड या स्टाप समाप्त हो चुके हैं, वहां उपलब्ध भूमि पर नई सुविधा विकसित की जाए। बसों के निर्बाध संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग सुनिश्चित करने को भी कहा गया। वहीं, परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
यात्रियों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं में सुधार किया जाएगा। बसों की फिटनेस, परमिट की शर्तों की जांच मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी करें। निजी बस आपरेटरों की बसों की फिटनेस, परमिट की शर्तों, चालकों के संचालन और व्यवहार की नियमित जांच के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें कराने एवं कलेक्टरों को क्षेत्रीय कंपनी के कार्यपालक निदेशक के साथ प्रत्येक सप्ताह बैठक करेंगे।
परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि योजना के तीन प्रमुख स्तंभ बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और अधोसंरचना हैं। पिछले 10 माह में किए गए यात्री संख्या और रूट सर्वे के आधार पर प्रदेश के सात क्षेत्रों में 3,636 मार्गों पर 13,006 बसों की आवश्यकता का आकलन किया गया है। इसी आधार पर सेवा का चरणबद्ध विस्तार होगा। यात्रियों को लाभांवित करने के साथ निजी आपरेटर के हित का भी ध्यान रखा गया है।
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राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय शुरू हो गया है। अगले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के कार्यालय उपलब्ध कराए जाएंगे। जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। 1,190 पदों में से 400 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए बस आपरेटरों से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं। यात्री एप के माध्यम से बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकते हैं।