
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी में स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री करने वाले पटवारी के प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जाएगी। सरकार से कानूनी सुरक्षा मिलने के बाद अब सोमवार से पटवारी निःशुल्क रजिस्ट्री का कार्य शुरू करेंगे। राजस्व विभाग ने इसका आदेश जारी कर दिया है। स्वामित्व योजना के अंतर्गत भू-अधिकारों का सरकारी तौर पर निष्पादन और पंजीयन कराया जा सकेगा। जिससे अब ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का पक्का और कानूनी रूप से रजिस्टर्ड मालिकाना हक मिल सकेगा।
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए राजस्व विभाग ने 'पटवारी' को राज्य शासन की ओर से निष्पादक अधिकारी (एग्जीक्यूटिंग ऑफिसर) नियुक्त किया है। पटवारी ही सरकार की तरफ से इन दस्तावेजों के निष्पादन की कमान संभालेंगे।
सरकार ने इस योजना को बिना किसी बाधा के लागू करने के लिए मैदानी अधिकारियों को सुरक्षा भी प्रदान की है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियमानुसार की गई इस निष्पादन की कार्यवाही के संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 218 के तहत अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की अभियोजन स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
यानी सही तरीके से काम करने वाले अधिकारियों पर कोई कानूनी केस नहीं चलाया जा सकेगा। इस नए आदेश के लागू होते ही पूर्व में 17 सितंबर को जारी आदेश तत्काल प्रभाव से अधिग्रहित (निरस्त) कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश के पटवारी स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क रजिस्ट्री के कार्य में सहयोग करने के लिए मान गए। मुख्यमंत्री से समत्व भवन मुख्यमंत्री आवास में मध्य प्रदेश पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने भेंट की थी।
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सीएम से मुलाकात के बाद मप्र पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि मुख्यमंत्री से उनकी सार्थक चर्चा हुई है। स्वामित्व योजना में आवश्यक न्यायिक संरक्षण की व्यवस्था कर दी गई है और समस्त पटवारी सोमवार से स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री का कार्य करेंगे।
बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इंदौर में स्वामित्व योजना के तहत निःशुल्क रजिस्ट्री का शुभारंभ 17 सितंबर को किया था। इसके बाद से लगातार पटवारी इस कार्य को करने का विरोध कर रहे थे।