
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। इंदौर शहर के भागीरथपुरा मोहल्ले में पिछले वर्ष दूषित जल से 36 लोगों की मौत होने के बाद जांच के लिए गठित स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) को सौंप दी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भागीरथपुरा के भूमिगत जल तक मलमूत्र में पाया जाने वाला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया पहुंच गया है। इससे पहले उच्च न्यायालय में पेश एक रिपोर्ट में बताया जा चुका है कि भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के 52 नमूनों में से 50 में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिले।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी फैलने का सबसे बड़ा कारण नगर निगम की जलापूर्ति लाइन में सीवर के पानी का मिलना था। प्रभावित लोगों ने पानी के स्वाद और गंध में बदलाव की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते नगर निगम के अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की।
गुरुवार को पेश रिपोर्ट में बताया गया कि विशेषज्ञ समिति ने घटना के तीन महीने बाद अलग-अलग स्रोतों के 43 नमूने लिए थे। उनमें से 10 नमूने नर्मदा पाइपलाइन के थे। इसमें ई-कोलाई नहीं मिला। यही पानी भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जाता है। पास की कान्ह नदी के तीन नमूनों में ई-कोलाई की भारी मौजूदगी मिली। वहीं एक बोरवेल में भी ई-कोलाई की हानिकारक मात्रा पाई गई। इससे साफ हुआ कि भूमिगत जल तक खतरनाक बैक्टीरिया पहुंच चुका है।
इस रिपोर्ट के बाद न्यायाधिकरण के सदस्य न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि जलापूर्ति व्यवस्था में हुई लापरवाही की कीमत आम लोगों ने अपनी जान देकर चुकाई है, इसलिए अब जिम्मेदारी तय किए बिना मामला नहीं छोड़ा जा सकता।
भागीरथपुरा कांड के बाद एनजीटी की केंद्रीय जोन पीठ के सामने रशीद नूर खान और कमल कुमार राठी ने जनवरी में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। उसके बाद पीठ ने विशेषज्ञ समिति बनाकर जांच कराने का निर्देश दिया था।
एनजीटी की सुनवाई के दौरान यह बात आई कि भागीरथपुरा कांड की जांच उच्च न्यायालय के आदेश पर बना न्यायिक आयोग कर रहा है। मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उस आयोग का सबसे बड़ा काम यह तय करना है कि आखिर किन अधिकारियों और एजेंसियों की लापरवाही से लोगों के घरों तक दूषित पानी पहुंचा।
फिलहाल एनजीटी ने पीसीबी की रिपोर्ट संबंधित पक्षों को भेजकर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी।
इनमें जर्जर पाइपलाइन बदलने, सीवर और पानी की लाइनों को अलग करने, लीकेज रोकने, सभी जलाशयों की नियमित सफाई, 24×7 हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप शुरू करने, एनएबीएल लैब से पानी की जांच कराने, जल गुणवत्ता रिपोर्ट सार्वजनिक करने, रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने और जल आपूर्ति प्रणाली की थर्ड पार्टी ऑडिट कराने को कहा है।
अधिकरण ने जल प्रदूषण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, सभी घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने, नए एसटीपी स्थापित करने, वर्षा जल संचयन लागू करने और सरकारी बोरवेल की जियो-टैगिंग के भी आदेश दिए हैं।