
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। सिम कार्ड एक्टिवेशन के फर्जीवाड़ा के लिए प्रदेशभर में चलाए जा रहे “आपरेशन फेस” के तहत पुलिस ने भोपाल से दो पीओएस (प्वाइंट आफ सेल) एजेंट को पकड़ा है। इन दोनों ने अपने ही प्रतिष्ठान के एक कर्मचारी के चेहरे पर 246 सिम कार्ड जारी कर दिए थे।
पकड़े जाने पर इनका कहना है कि कंपनी का सेल टारगेट पूरा करने के लिए उन्होंने ऐसा किया। स्टेट साइबर मुख्यालय ने दूरसंचार विभाग से मिली सूचना के आधार पर "आपरेशन फेस" शुरू किया था। जांच में सामने आया कि शहर में कुछ एजेंट फर्जी तरीके से सिम कार्ड जारी कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी और अन्य अपराधों में हो सकता है।
जांच के दौरान जहांगीराबाद क्षेत्र के देवेंद्र यादव का नाम सामने आया, जिसकी पहले ओल्ड सुभाष नगर में दुकान थी। उसने वर्ष 2021-22 के दौरान एक ही युवक के चेहरे और बायोमेट्रिक का उपयोग कर 100 से ज्यादा सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिए।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिन ग्राहकों के नाम पर सिम जारी की गईं, उनकी आइडी अलग-अलग थीं, लेकिन बायोमेट्रिक एक ही व्यक्ति का इस्तेमाल किया गया। यह व्यक्ति फैजान नामक युवक बताया जा रहा है, जो उसी दुकान पर काम करता था और वर्ष 2023 से लापता है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि उसकी जानकारी का दुरुपयोग कैसे किया गया और वह इस पूरे नेटवर्क में किस हद तक शामिल था।
जांच में दूसरे आरोपित के रूप में तलैया के कसाई मोहल्ला निवासी सैफ कुरैशी का नाम भी सामने आया, जो आधार सेंटर संचालित करता है। आरोप है कि उसने भी इसी युवक के चेहरे का इस्तेमाल कर कई सिम जारी कीं। फिलहाल फर्जीवाड़ा कर जारी की गईं 246 सिमों में से 55 सिम की पुष्टि हुई है, जिनमें से 52 देवेंद्र और 3 सैफ की आइडी द्वारा एक्टिवेट की गई बताई जा रही हैं। आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उस समय टेलीकाम कंपनियों के टारगेट पूरे करने के दबाव में इस तरह का फर्जीवाड़ा किया गया।
पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल टारगेट पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। फिलहाल मामले की तकनीकी जांच जारी है। मामला टेलिकाम कंपनियों तक जाएगा।
दो आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन अपराधों में हुआ। साथ ही, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।- शैलेंद्र सिंह चौहान, एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच