
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई 'एक बगिया मां के नाम' परियोजना में प्रदेश के पांच जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। यहां के प्रशासन की अरुचि की वजह से केवल 32 से 41 प्रतिशत तक ही काम हो सका है। इनमें टीकमगढ़, सिवनी, नर्मदापुरम, सतना और मुरैना जिले शामिल हैं।
संभागवार देखें तो भोपाल संभाग में सर्वाधिक 60 प्रतिशत काम हुआ और चंबल संभाग में 41 प्रतिशत काम ही हो पाया। इसे लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने नाराजगी जताई है और पिछड़े जिले व संभागों को काम की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। खरगोन, सिंगरौली, रायसेन, बड़वानी और बालाघाट जिलों में कार्य की प्रगति बेहतर है, यहाँ 71 से 90 प्रतिशत तक काम हुआ है।
बता दें, राज्य सरकार ने यह परियोजना पिछले साल 15 अगस्त से शुरू की थी। इसके तहत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर आधा से एक एकड़ में फलदार पौधे (आम, अमरूद आदि) लगाए जा रहे हैं। इसमें सरकार द्वारा तीन लाख रुपये तक की सहायता, फेंसिंग और सिंचाई की सुविधा मनरेगा परिषद के माध्यम से दी जा रही है।
इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक महिलाओं को लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए जाने थे। प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन कर समूह की पात्र महिलाओं को बकायदा प्रशिक्षित किया गया।
पौधारोपण की ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी की जा रही है। योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कंटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान की गई।
प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तरीके से पौधारोपण के लिए 'सिपरी' सॉफ्टवेयर की मदद ली गई है। इसके माध्यम से पौधारोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से किया गया है। पौधारोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।
यह भी पढ़ें- कातिल पति का हाई-प्रोफाइल ड्रामा... पत्नी की हत्या के बाद खुद ही पहुंचा पुलिस चौकी, ऐसे खुला राज