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एमपी के निजी मेडिकल कॉलेजों में 8 साल बाद लौटेगा 'मैनेजमेंट कोटा', 30% सीटों पर मिलेगा दाखिला, 15% NRI कोटा भी रहेगा बरकरार

इस नई नीति के तहत प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में करीब 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 30 प्रतिशत 'मैनेजमेंट कोटा' फिर से शुरू किया जाएगा। भविष्य...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 11:22:10 AM (IST)Updated Date: Wed, 22 Jul 2026 11:28:34 AM (IST)
एमपी के निजी मेडिकल कॉलेजों में 8 साल बाद लौटेगा 'मैनेजमेंट कोटा', 30% सीटों पर मिलेगा दाखिला, 15% NRI कोटा भी रहेगा बरकरार
एमपी के निजी मेडिकल कॉलेजों में 8 साल बाद लौटेगा 'मैनेजमेंट कोटा' (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. राज्य सरकार ला रही है 'प्रवेश नियम-2026'
  2. तमिलनाडु और राजस्थान की तर्ज पर तैयार हुआ ड्राफ्ट
  3. 15% एनआरआई कोटा भी रहेगा बरकरार

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार वर्ष 2018 के मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स में संशोधन करके 'प्रवेश नियम-2026' लागू करने की तैयारी में है। इस नई नीति के तहत प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में करीब 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 30 प्रतिशत 'मैनेजमेंट कोटा' फिर से शुरू किया जाएगा। भविष्य में इसे बढ़ाकर 35 प्रतिशत तक करने का विकल्प भी खुला रखा गया है।

नए मसौदे के अनुसार, 15 प्रतिशत एनआरआई (NRI) कोटा पहले की तरह बना रहेगा, जबकि बाकी बची 55 फीसदी सीटों पर सामान्य काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए प्रवेश दिया जाएगा। इस नीति का ड्राफ्ट तमिलनाडु और राजस्थान के मेडिकल एजुकेशन मॉडल का गहन अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है।


सरकारी खजाने पर घटेगा 1000 करोड़ का बोझ

राज्य सरकार का मानना है कि इस नीतिगत बदलाव से सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में मेधावी विद्यार्थी योजना, एससी-एसटी (SC/ST) और ओबीसी (OBC) वर्ग के छात्रों की मेडिकल फीस और स्कॉलरशिप पर सरकार को सालाना लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की सीटों पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की फीस का वहन सरकार को नहीं करना पड़ेगा। इससे राज्य सरकार को हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से काउंसलिंग के बाद निजी कॉलेजों में खाली रह जाने वाली सीटों की समस्या समाप्त होगी और जिन छात्रों को सामान्य मेरिट से सीट नहीं मिल पाती थी, उन्हें भी पढ़ाई का अवसर मिलेगा।

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महंगी होगी पढ़ाई

प्रस्तावित नियमों के तहत मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर भी प्रवेश केवल NEET की मेरिट और राज्य स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से ही संभव होगा। बिना नीट पास किए किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं मिलेगा। हालांकि, इस व्यवस्था से मेडिकल की पढ़ाई काफी महंगी होने के आसार हैं। मैनेजमेंट सीटों की फीस सामान्य निजी सीटों से कई गुना अधिक रखी जाएगी। यह सरकारी कोटे की ट्यूशन फीस से लगभग 3 गुना तक ज्यादा हो सकती है।

तमिलनाडु में मैनेजमेंट कोटे की सालाना फीस 40 से 56 लाख रुपये और राजस्थान में 28 से 30 लाख रुपये तक है। मध्य प्रदेश में अंतिम फीस का निर्धारण प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति (FRC) और एमपी पीयूआरसी (MPPURC) द्वारा किया जाएगा। इस संशोधित नीति के मसौदे को जल्द ही पहले राज्य कैबिनेट और उसके बाद विधानसभा की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।