
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में लगभग दो साल बाद रेस्टोरेंट, माल, सिनेमाघर, बिजनेस सेंटर आदि रातभर खोले रखने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम विभाग चार कानूनों को मिलाकर मध्य प्रदेश कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस 2026 विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत करने जा रहा है।
इसमें प्रविधान को संशोधित किया जा रहा है, जिससे कामगारों की सुविधा के लिए 24 घंटे दुकानें खोली जा सकें। हालांकि, यह कहां खुलेंगी और कहां नहीं, इसका अधिकार सरकार को होगा। स्थानीय परिस्थितियों को देखकर इस पर निर्णय लिया जाएगा।
मध्य प्रदेश कोड आन एंपावरिंग वर्क स्पेस 2026 विधेयक में कामगारों के हित में कई प्रविधान किए जा रहे हैं। इसमें एक 24 घंटे रेस्टोरेंट, माल, सिनेमाघर आदि खोला जाना भी शामिल है। इसके पीछे तर्क यह है कि निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों के कारण बड़ी संख्या में उद्योग आ रहे हैं। आइटी के क्षेत्र में तेजी के साथ काम हो रहा है।
कई कंपनियों में 24 घंटे तीन-तीन पालियों में काम होता है। ऐसे में रात में काम करने वाले कर्मचारियों को खाने-पीने की दुकानें बंद होने से परेशानी होती है। इसे देखते हुए प्रविधान प्रस्तावित किया है। वहीं, रात की पाली में काम करने वाले कर्मचारियों को दिन में काम करने वाले कर्मचारियों की तुलना में कार्यावधि का लाभ देना भी प्रस्तावित किया है। यह अवधि कितनी रहेगी, यह सरकार निर्धारित करेगी।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना में चिह्नित स्थानों पर बाजार 24 घंटे खोलकर रखने की अनुमति है। इसमें माल, रेस्टोरेंट, बिजनेस सेंटर, सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यालय शामिल हैं।
24 घंटे चिह्नित स्थानों पर बाजार खोलने के नियमों में संशोधन करने के लिए भारत सरकार ने सभी राज्यों से कहा था। दरअसल, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रचलित नियमों में संशोधन आवश्यक है। मध्य प्रदेश दुकान स्थापना अधिनियम 1958 के नियम की धारा-छह में इसके लिए संशोधन करना होगा। श्रमिकों से जुड़ा मामला होने के कारण श्रम संहिता में लेकर संशोधन प्रस्तावित किया है।
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वर्ष 2024 में बाजारों को 24 घंटे खोलने की कवायद शुरू हुई थी। पहले भोपाल और इंदौर में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जाना प्रस्तावित किया गया था। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सभी नगर निगमों और औद्योगिक क्षेत्रों तक इसे ले जाने की घोषणा की थी।
श्रम विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया लेकिन नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि शहरों में सफाई का काम रात में होता है, जो बाजार खुलने से प्रभावित होगा। कानून व्यवस्था की स्थिति का भी हवाला दिया गया था। वहीं, श्रम विभाग का तर्क था कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे राजस्व में भी वृद्धि होगी।