भोपाल बनेगा देश का सबसे सुरक्षित शहर? AI कैमरे, ड्रोन और 8 नए कड़े नियमों से बदलेगी राजधानी की सुरक्षा
राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, सुरक्षित और अपराधमुक्त महानगर के रूप में विकसित करने के लिए भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में एक व्यापक कार...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 07:24:45 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 07:24:45 PM (IST)
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के तहत 'सेफ सिटी' का ड्राफ्ट तैयारHighLights
- भोपाल मास्टर प्लान 2047 के तहत 'सेफ सिटी' का ड्राफ्ट तैयार
- कॉलोनियों के सीसीटीवी पुलिस और स्मार्ट सिटी सर्वर से जुड़ेंगे
- सुरक्षा, इमरजेंसी शेल्टर और फायर स्टेशन के 8 पैरामीटर तय
पंकज श्रीवास्तव, नईदुनिया, भोपाल। राजधानी भोपाल को वर्ष 2047 तक आधुनिक, सुरक्षित और अपराधमुक्त महानगर के रूप में विकसित करने के लिए भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में एक व्यापक कार्ययोजना शामिल की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर को आधिकारिक तौर पर सेफ सिटी का दर्जा दिलाना है, जहां नागरिक पूरी तरह भयमुक्त वातावरण में रह सके। सुरक्षित शहर की यह परिकल्पना केवल पुलिसिया गश्त तक सीमित नहीं रहेगी।
ड्राफ्ट में पहली बार सेफ सिटी के मद्देनजर कॉलोनियों में लगे सीसीटीवी कैमरों को सेंट्रलाइज्ड करने का प्रविधान किया गया है। सोसायाटी पदाधिकारियों से सहमति के बाद कैमरों का एक्सेस पुलिस कंट्रोल रूम और स्मार्ट सिटी से जोड़ा जाएगा। ताकि घटना और दुर्घटना के समय पुलिस को सीसीटीवी फुटेज देखने के लिए घर-घर चक्कर ना लगने पड़े।
सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत सीसीटीवी फुटेज देखकर एक्शन ले सके। सेफ सिटी के लिए इसके अलावा आपदा प्रबंधन शेल्टर समेत आठ प्रमुख पैरामीटर तय किए गए हैं।
सेफ सिटी के यह है आठ पैरामीटर
- प्रमुख स्थानों पर एआइ आधारित सीसीटीवी, ड्रोन, अलार्म, कंट्रोल सेंटर और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट के लिए विशेष मोबाइल ऐप।
- सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए निजी भवन और कालोनियों के गेट लगे कैमरों को पुलिस व प्रशासन के सेंट्रल सर्वर से जोड़ना।
- संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक हथियारों और बेहतर सुविधाओं से लैस पुलिस बल की तैनाती।
- पार्कों व भवनों में ऊंची दीवारों की जगह पारदर्शी फेंसिंग, चौतरफा स्ट्रीट लाइट्स और सक्रिय सामाजिक निगरानी।
- नियंत्रित गति, सही ज्यामिति, डिवाइडर, सिग्नल और पैदल यात्रियों के लिए मानक जेब्रा क्रासिंग व फुटपाथ।
- बसों व मेट्रो में आधुनिक सुरक्षा उपकरण, चालक-परिचालकों का प्रशिक्षण और बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी।
- कॉम्प्रेहेंसिव फायर मैनेजमेंट प्लान के तहत हर 50 हजार की आबादी पर एक नए फायर स्टेशन का निर्माण।
- आपातकाल के लिए स्कूल, कॉलेज व सामुदायिक भवनों को भूकंपरोधी व बाढ़ से सुरक्षित राहत केंद्रों के रूप में तैयार करना।
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शहर को सेफ सिटी बनाने के लिए आठ पैरामीटर तय किए गए हैं। पहली बार कालोनियों में लगे सीसीटीवी कैमरों को सेंट्रलाइज्ड करने का प्रविधान किया गया है। कैमरों का एक्सेस पुलिस कंट्रोल रूम और स्मार्ट सिटी से जोड़ा जाएगा। - नीरज आनंद लिखार, ज्वाइंट डायरेक्टर, टीएंडसीपी