
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शहर के 2047 के मास्टर प्लान को लेकर ग्रामीण क्षेत्र के किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि भोजताल संरक्षण, रिवरफ्रंट, फारेस्ट और ग्रीन बेल्ट जैसी श्रेणियों के नाम पर 66 गांवों की निजी कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इससे खेती पर निर्भर हजारों किसानों के भूमिहीन होने और आजीविका छिनने का खतरा पैदा हो गया है। इसी को लेकर बुधवार को किसानों ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
जानकारी के अनुसार किसान इस मुद्दे पर बड़ा विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं। विरोध के लिए किसान गुरुवार को मुगालिया छाप से संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय तक पदयात्रा निकालेंगे। किसान नेता अनोखी मानसिंह पटेल और ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का कहना है कि जिन जमीनों पर वे कई पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं, उन्हें अब प्रस्तावित मास्टर प्लान में भोजताल संरक्षण जोन-एक और जोन-दो यानी बीआइजेड-1 और बीआइजेड-2 में शामिल किया जा रहा है।
किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और 2031 के ड्राफ्ट प्लान में उनकी जमीन का लैंडयूज कृषि था। अब भू-उपयोग बदलने से खेती करना मुश्किल हो जाएगा। कृषि ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। अगर जमीन संरक्षण की दूसरी श्रेणियों में शामिल होती है तो उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। किसानों की मांग है कि बीआइजेड 1 व 2 के प्रस्ताव को हटाया जाए और उनकी जमीन का भू-उपयोग कृषि ही रखा जाए।
मास्टर प्लान में बीआईजेड का इस्तेमाल आमतौर पर बिजनेस या व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए किया जाता है। यह अलग-अलग श्रेणियों के व्यावसायिक उपयोग जैसे दुकानें, शॉपिंग मॉल, ऑफिस, गोदाम या छोटे उद्योगों को दर्शाता है। किसानों का कहना है कि अगर उनकी कृषि भूमि को इस श्रेणी में डाल दिया गया तो वे वहां खेती नहीं कर पाएंगे। इसी कारण से किसान दोबारा भूमि का उपयोग कृषि करने की मांग कर रहे हैं।
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किसानों ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान तैयार करने में 66 ग्राम पंचायतों की सहमति नहीं ली गई। ग्राम सभाओं की भागीदारी के बिना गांवों के भविष्य से जुड़े फैसले नहीं होने चाहिए। उनकी मांग है कि सभी संबंधित ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कराकर प्रस्तावित भू-उपयोग पर चर्चा की जाए और उनकी सहमति व सुझाव लिए जाएं। बिना सहमति के विकास का प्लान थोपना गलत है।
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भोपाल विकास योजना 2047 पर दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर है। बुधवार तक 1800 से अधिक आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। इसके बाद यह मुद्दा ग्रामीण क्षेत्र में और महत्वपूर्ण हो गया है। अब नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के सामने चुनौती है कि वह किसानों की चिंताओं, कृषि भूमि के प्रस्तावित भू-उपयोग परिवर्तन और ग्राम सभाओं की भागीदारी से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट करे और किसानों को भरोसा दिलाए।