
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,भोपाल। 'ऑपरेशन सिंदूर' में सेना के पराक्रम की जानकारी देश-दुनिया के सामने रखने वाली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित भाषा बोलने वाले मंत्री विजय शाह की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कारण, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआइटी विजय शाह के अन्य विवादित बयानों की जांच भी कोर्ट के निर्देश पर कर रही है।
जांच के तीन बिंदु हैं, जिनमें सबसे मुख्य बिंदु मंत्री के अन्य अमर्यादित बयान हैं। यह रिपोर्ट भी एसआइटी शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।
उधर, सोमवार को कोर्ट ने इसी मामले में विजय शाह को लेकर कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार राज्य कानून के अनुसार अभियोजन की मंजूरी के लिए उचित कदम उठाए। शाह के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति का मामला गृह और विधि विभाग होते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक जाएगा।
बता दें कि विजय शाह ने 11 मई 2025 को इंदाैर के आंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सभा के दौरान साेफिया कुरैशी को कथित तौर पर आतंकवादियों की बहन बता दिया था। 14 मई को हाई कोर्ट ने विजय शाह के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने के लिए कहा था। उसी दिन मानपुर थाने में एफआइआर दर्ज की गई।
विजय शाह ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, तभी से इस मामले की सुनवाई वहां चल रही है। कोर्ट के निर्देश राज्य शासन ने तीन आइपीएस अधिकारियों को मिलाकर एसआइटी का गठन किया था। पूरे मामले में एसआइटी तीन स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर चुकी है।
अमर्यादित टिप्पणी के मामले में अब तक विजय शाह सहित 27 लोगों के बयान एसआइटी ले चुकी है। अब अन्य विवादित और अमर्यादित बयानों को लेकर साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। लगभग एक माह पहले शाह ने लाड़ली बहनों को धमकी भरे अंदाज में कहा था कि उन्हें मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए आगे आना चाहिए। इसके पहले भी उनके कुछ आपत्तिजनक बयान इंटरनेट मीडिया में बहुप्रसारित हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने मंत्री विजय शाह और सरकार को घेरा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने भाजपा की सोच और चरित्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सेना की अधिकारी, देश की बेटी और राष्ट्र के सम्मान पर हमला हुआ, लेकिन भाजपा सरकार महीनों तक एसआइटी की रिपोर्ट दबाए बैठी रही।
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मंत्री विजय शाह से मुख्यमंत्री को तत्काल त्यागपत्र लेना चाहिए। उन्हें पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त करना चाहिए। विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा, जब तक जांच चल रही है, विजय शाह को मंत्री पद से त्यागपत्र देना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कहा, पूरे प्रकरण में तथ्य स्वयं बहुत कुछ कह रहे हैं। एसआइटी की रिपोर्ट के बावजूद पांच माह में अभियोजन की स्वीकृति न दिया जाना गंभीर बात है।