नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। रेलवे सुरक्षा को लेकर आरपीएफ समय-समय पर कार्रवाई के आंकड़े जारी करता है। बिना टिकट यात्रियों और अवैध वेंडरों समेत अन्य मामलों में कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। दूसरी ओर, रेल मदद पर आने वाली शिकायतें ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अलग तस्वीर सामने रखती हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब ट्रेनों और स्टेशनों पर लगातार निगरानी का दावा किया जाता है तो यात्रियों से अभद्रता, मारपीट और अवैध लोगों के ट्रेन में पहुंचने जैसी घटनाएं कैसे हो रही हैं।
शिकायतें सार्वजिनक करने की मांग
रेलवे और आरपीएफ की ओर से कार्रवाई के आंकड़े जारी किए जाते हैं। लेकिन यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर कितनी जांच हुई, कितने मामलों में कार्रवाई की गई और कितनी शिकायतें जांच में गलत पाई गईं, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
इससे यह स्पष्ट होगा कि रेल मदद पर आने वाली शिकायतों को केवल दर्ज और निस्तारित किया जा रहा है या उनके आधार पर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार भी किया जा रहा है।
केस-1
भोपाल स्टेशन से जुड़े एक मामले में ट्रेन संख्या 11072 के एस-2 कोच की सीट नंबर 56 पर यात्रा कर रहे यात्री ने इंटरनेट मीडिया पर शिकायत की। यात्री ने आरोप लगाया कि भोपाल स्टेशन पर टीटीई ने उसके साथ मारपीट और अभद्रता की।
यात्री ने रेलवे से मदद की अपील करते हुए कार्रवाई की मांग की। ऐसे मामले में यह जानना जरूरी है कि शिकायत के बाद रेलवे ने किस स्तर पर जांच की और संबंधित कर्मचारी से क्या जवाब लिया गया।
केस-2
इसी तरह इटारसी-भोपाल के बीच ट्रेन संख्या 12590 चार्लापल्ली-गोरखपुर एक्सप्रेस के एस-4 कोच में महिला यात्री और उसके परिजन के साथ बाहर के वेंडर द्वारा मारपीट की शिकायत सामने आई। महिला के साथ उसका पति और बच्चा भी यात्रा कर रहे थे।
घटना की सूचना ऐशबाग जंक्शन पर दोपहर 2:09 बजे मिलने की जानकारी सामने आई। पेंट्री कार मैनेजर के अनुसार घटना इटारसी से भोपाल के बीच हुई थी। यात्री अंकित पांडे के वीडियो के बाद मामले की जांच की गई।
अवैध वेंडर ट्रेन में पहुंचा कैसे?
इस मामले में मारपीट के साथ सबसे बड़ा सवाल ट्रेन में अवैध वेंडर के प्रवेश को लेकर है। यदि संबंधित व्यक्ति अधिकृत वेंडर नहीं था तो वह ट्रेन में चढ़ा कैसे? निगरानी के बावजूद वह यात्रियों तक कैसे पहुंचा और घटना के दौरान सुरक्षा अमला कहां था?
रेलवे और आरपीएफ की ओर से ऐसे मामलों में जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
यह है सवाल
रेल सुरक्षा का आकलन केवल कार्रवाई के आंकड़ों से नहीं, बल्कि शिकायत के बाद हुई कार्रवाई से भी होना चाहिए। शिकायत सही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय हो और गलत पाए जाने पर जांच के तथ्य सामने रखे जाएं। इससे यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और रेल मदद शिकायत दर्ज कराने के साथ जवाबदेही तय करने का प्रभावी माध्यम बन सकेगी।
दोनों घटनाओं की जानकारी लेने के लिए आरपीएफ कमांडेंट डॉ. अभिषेक सिंह को कॉल और मैसेज किए गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जानकारी नहीं मिली।