• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • भोपाल

Bhopal Airport को मिलेगा आसमान का चौकीदार, लगने जा रहा है मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार सिस्टम, जानिए कैसे करेगा काम

MP News: एयरपोर्ट अथॉरिटी यहां अत्याधुनिक मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार सिस्टम (MSSR) स्थापित करने जा रही है। इसकी मदद से 60 हजार फीट तक की ऊंचाई से...और पढ़ें

By dilip mangtaniEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 28 Sep 2025 06:14:56 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Sep 2025 06:29:37 PM (IST)
Bhopal Airport को मिलेगा आसमान का चौकीदार, लगने जा रहा है मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार सिस्टम, जानिए कैसे करेगा काम
नए भवन में अत्याधुनिक राडार स्थापित करने का काम शुरू।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। अब दुश्मन देश के विमान भी भोपाल एयर ट्रैफिक क्षेत्र की निगाहों से नहीं बच सकेंगे। एयरपोर्ट अथॉरिटी यहां अत्याधुनिक मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार सिस्टम (MSSR) स्थापित करने जा रही है। इसकी मदद से 60 हजार फीट तक की ऊंचाई से गुजर रहे विमान भी स्कैन हो सकेंगे। नियमित विमानों की निगरानी करना आसान हो जाएगा। रडार की स्थापना के बाद विमान क्षेत्र से गुजरने वाला हर विमान रडार की जद में होगा। विमान की दिशा कौन सी है और कितनी ऊंचाई पर है यह भी पता चल जागा। अधिक ऊंचाई पर फ्लाइंग करने वाले विमान भी स्कैन हो सकेंगे।

रडार की आंखों से नहीं बच सकेगा कोई विमान

आमतौर पर विमान 30 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। नई तकनीक पर आधारित इंटरनेशनल उड़ानें 50 से 60 हजार फीट की ऊंचाई पर होती हैं। अधिक ऊंचाई पर होने के कारण इनका एयर ट्रैफिक कंट्रोल रूम से संपर्क नहीं हो पता। सर्विलांस रडार की मदद से अधिक ऊंचाई पर फ्लाइंग कर रहे विमान भी रडार की आंखों से नहीं बच सकेंगे। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि कोई दुश्मन देश का विमान अधिक ऊंचाई से गुजरेगा तो रडार संकेत दे देगा कि कौन से विमान किस दिशा में जा रहा है।


नया भवन तैयार, स्थापना होना बाकी

मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार स्थापित करने के लिए एटीसी के निकट ही नया भवन बनाया गया है। रडार नार्वे से आयात किया गया है। यह भोपाल आ चुका है। जल्द ही इसकी स्थापना की जाएगी। दिसंबर तक इसका ट्रायल होगा। नववर्ष में यह काम करने लगेगा।

आपात स्थिति में दिशा निर्देश देना आसान

रडार की स्थापना से आपात स्थिति में चालक दल को जरूरी दिशा-निर्देश देना आसान हो जाएगा। रडार की मदद से डाटा नागपुर एवं दिल्ली भेजे जा सकेंगे। इससे दो फायदे होंगे। एक आपात स्थिति में तत्काल जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे। दूसरा दुश्मन देश का विमान होने पर बिना समय गंवाए एक्शन लेना आसान होगा। रडार की मदद से दो विमानों की एक साथ निगरानी हो सकेगी। नैनो सेकंड तक की स्थिति स्पष्ट होगी। हवाई यातायात प्रबंधन आसान होगा। माना जा रहा है कि देश की भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भोपाल महत्वपूर्व है, इसलिए यहां भी अत्याधुनिक नेक्सट जेनरेशनल रडार स्थापित हो रहा है।

यह भी पढ़ें- MP Top News: पिता ने की बेटी की हत्या, नायब तहसीलदार की पत्नी से लूट, शहडोल में रेल ट्राली से टकराई ट्रेन

अब हर विमान रडार के दायरे में होगा

एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने कहा कि सर्विलांस रडार स्थापित होने से विमान किस स्थिति में है। स्पीड क्या है, ऊंचाई कितनी है इसका पता चल सकेगा। डाटा एकत्रित कर मुख्यालय तक भेजना आसान होगा। नया सिस्टम अत्याधुनिक है। अब हर विमान रडार के दायरे में होगा।