डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र बुधवार को निर्धारित अवधि से पहले ही तीन दिन में समाप्त हो गया। इस दौरान सरकार ने कुल 15 विधेयक सदन में प्रस्तुत कर पारित कराए। अंतिम दिन अनुपूरक बजट के साथ 6 अहम संशोधन विधेयकों को भी सदन की मंजूरी मिली।
हालांकि पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक, हंगामा और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंटवारे पर बहस
सत्र के अंतिम दिन सबसे अधिक चर्चा रानी दुर्गावती आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को लेकर हुई। कांग्रेस ने मेडिकल विश्वविद्यालयों के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा।
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 15 साल पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी को बांटने की आखिर क्या जरूरत है? घनघोरिया ने इसे जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र की उपेक्षा तथा मेडिकल विशेषज्ञों का अपमान बताया ।
वहीं कांग्रेस के ही विधायक महेश परमार ने उज्जैन में मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलने का समर्थन किया। घनघोरिया ने सवाल उठाया कि क्या इस बंटवारे पर मेडिकल एक्सपर्ट्स और छात्रों से कोई राय ली गई है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसी एक व्यक्ति की इच्छा पर यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांट रही है।
विपक्ष का कहना था कि प्रदेश में पहले से मौजूद चिकित्सा संस्थानों की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जबकि सरकार ने विधेयक को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
'गुजरात को राशि देने बढ़ाया एनवीडीए का बजट': कांग्रेस का आरोप
अनुपूरक बजट पर भी सदन में लंबी चर्चा हुई। कांग्रेस ने सरकार पर वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बजट प्रावधानों और वास्तविक खर्च में बड़ा अंतर है।
अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। बच्चन ने कहा कि सबसे ज्यादा 38% राशि नर्मदा घाटी विकास विभाग को दी गई है, क्योंकि मप्र सरकार को गुजरात सरकार को 231 करोड़ रुपये देने थे, जबकि गुजरात से 7 हजार करोड़ से ज्यादा लेना था, पर अब उल्टा मप्र को पैसा देना पड़ेगा ।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कर्ज लेने की सारी सीमाएं पार कर दी हैं और अब ब्याज के रूप में 80 करोड़ रुपये प्रदेश को चुकाने पड़ रहे हैं । साथ ही उन्होंने तंज कसा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का संग्रहालय बनाने 5 करोड़ का प्रावधान किया गया था, पर सिर्फ 50 लाख ही खर्च किए जा सके।
वहीं सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि विकास कार्यों, अधोसंरचना, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए गए हैं तथा प्रदेश के समग्र विकास को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया गया है।
कांग्रेस विधायकाें ने जमकर किया हंगामा
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर काली पट्टी बांधकर सदन पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष ने नारेबाजी की, जिससे सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। कई बार विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
तीन दिवसीय मानसून सत्र में सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाते हुए कुल 15 विधेयक पारित कराए। इनमें विभिन्न विभागों से जुड़े संशोधन और प्रशासनिक सुधार संबंधी विधेयक शामिल रहे। वहीं विपक्ष ने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरने का प्रयास किया।