हल्ला मचने पर अधिकारियों की बैठकें होती हैं। एफआईआर, अर्थदंड व अन्य कार्रवाई की जाती है। फिर भी मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वजह, सरकार किसानों को इसका कोई विकल्प नहीं दे पाई है।
उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक प्रदेश में पराली जलाने की 350 घटनाएं दर्ज की गई हैं।
यह भी देश में सर्वाधिक हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश के रहेंगे। रोकथाम के उपाय नहीं हुए तो स्थिति बिगड़ेगी।
वर्ष 2021 से 2025 तक राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े
| राज्य | 2021 | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 |
| मध्य प्रदेश | 8,160 | 1,737 | 12,560 | 16,074 | 17,067 |
| पंजाब | 71,304 | 49,922 | 36,663 | 10,887 | 5,114 |
| हरियाणा | 6,984 | 3,661 | 2,303 | 1,389 | 662 |
| उत्तर प्रदेश | 4,242 | 3,017 | 3,996 | 5,769 | 7,290 |
| राजस्थान | 1,350 | 1,268 | 1,775 | 2,762 | 2,890 |
| कुल योग | 92,407 | 56,157 | 57,242 | 36,893 | 33,028 |
नोट: आंकड़े भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पोर्टल के अनुसार प्रत्येक वर्ष 30 नवंबर तक के हैं। इसमें सर्वाधिक मामलों वाले प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है।
15 वर्ष तक प्रदूषण में रहने से आधी रह जाती है फेफड़े की क्षमता 'स्मोग' यानी धुआं और कोहरा फेफड़े की बीमारियां बढ़ता है। 15 वर्ष तक कोई व्यक्ति इसी तरह की परिस्थिति में रहता है तो उसके फेफड़े की क्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है। स्मोग के समय में ओपीडी में 25 प्रतिशत तक रोगी बढ़ जाते हैं। जिन्हें एलर्जी की समस्या है उन्हें अस्थमा या निमोनिया हो जाता है। दूसरा, लगातार प्रदूषण में रहने से प्रतिरोधक क्षमता घटने से दूसरी संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। - डॉ. पराग शर्मा, सह प्राध्यापक, छाती एवं श्वास रोग विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल