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बढ़ता खतराः पराली जलाने में देश में सबसे आगे MP; साल 2025 में टूटे रिकॉर्ड, सैटेलाइट आंकड़ों से हुआ खुलासा

सैटेलाइट आधारित आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 के बीच मध्य प्रदेश में पराली जलाने की 350 घटनाएं दर्ज की गईं। वर्ष 2025 में प्रदेश मे...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 09:15:11 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 09:24:05 AM (IST)
बढ़ता खतराः पराली जलाने में देश में सबसे आगे MP; साल 2025 में टूटे रिकॉर्ड, सैटेलाइट आंकड़ों से हुआ खुलासा
प्रतीकात्मक फोटो।

HighLights

  1. देश में पराली जलाने के आधे से अधिक मामले मध्य प्रदेश में
  2. वर्ष 2025 में प्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक 1,520 घटनाएं
  3. प्रदूषण से बढ़ रहा फेफड़ों और श्वसन स्वास्थ्य पर खतरा

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। देशभर में पराली जलाने की जितनी घटनाएं दर्ज की जा रही हैं, उनमें 50 प्रतिशत से अधिक मध्य प्रदेश की हैं। वर्ष 2025 में विभिन्न राज्यों में इसके कुल 33,028 मामले सामने आए, जिसमें 17,067 (51 प्रतिशत) मध्य प्रदेश के थे। वर्ष 2021 के पहले सालभर में पांच हजार मामले भी सामने नहीं आ रहे थे लेकिन इसके बाद लगातार बढ़े हैं।

इसकी वजह से ठंड के मौसम में कई बार कुछ क्षेत्रों में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कम होती जा रही है। इसके बाद भी न किसान चेत रहे हैं और न ही सरकार चिंता कर रही है।


सैटेलाइट आंकड़ों से खुलासा

वर्ष 2024 में प्रदेश में पराली जलाने के 16,074 और वर्ष 2025 में 17,067 मामले सामने आए जो देश में सर्वाधिक हैं। ये आंकड़े सैटेलाइट के हैं इसलिए किसी गफलत की गुंजाइश भी नहीं है। नवंबर में तो कोहरा और बादलों के दौरान पराली जलाने से वायु गुणवत्ता (एयर क्वालिटी इंडेक्स) कुछ जिलों में खराब या बहुत खराब स्थिति में पहुंच जाता है।

हल्ला मचने पर अधिकारियों की बैठकें होती हैं। एफआईआर, अर्थदंड व अन्य कार्रवाई की जाती है। फिर भी मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वजह, सरकार किसानों को इसका कोई विकल्प नहीं दे पाई है।

उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक प्रदेश में पराली जलाने की 350 घटनाएं दर्ज की गई हैं।

यह भी देश में सर्वाधिक हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सबसे अधिक मामले मध्य प्रदेश के रहेंगे। रोकथाम के उपाय नहीं हुए तो स्थिति बिगड़ेगी।

यह भी पढ़ें- NGT सर्वे में खुलासा: भोपाल के चौराहों पर शोर का 'ओवरलोड'; 69 में से 47 जगहों पर ध्वनि प्रदूषण खतरनाक स्तर पर

वर्ष 2021 से 2025 तक राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े

राज्य 2021 2022 2023 2024 2025
मध्य प्रदेश 8,160 1,737 12,560 16,074 17,067
पंजाब 71,304 49,922 36,663 10,887 5,114
हरियाणा 6,984 3,661 2,303 1,389 662
उत्तर प्रदेश 4,242 3,017 3,996 5,769 7,290
राजस्थान 1,350 1,268 1,775 2,762 2,890
कुल योग 92,407 56,157 57,242 36,893 33,028

नोट: आंकड़े भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पोर्टल के अनुसार प्रत्येक वर्ष 30 नवंबर तक के हैं। इसमें सर्वाधिक मामलों वाले प्रमुख राज्यों को शामिल किया गया है।

मध्य प्रदेश में किसी एक दिन में पराली जलाने की सर्वाधिक घटनाएं

वर्ष तारीख घटनाएं
2021 16 नवंबर 660
2022 8 नवंबर 783
2023 5 नवंबर 698
2024 13 नवंबर 1,124
2025 16 नवंबर 1,520

स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय

15 वर्ष तक प्रदूषण में रहने से आधी रह जाती है फेफड़े की क्षमता 'स्मोग' यानी धुआं और कोहरा फेफड़े की बीमारियां बढ़ता है। 15 वर्ष तक कोई व्यक्ति इसी तरह की परिस्थिति में रहता है तो उसके फेफड़े की क्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है। स्मोग के समय में ओपीडी में 25 प्रतिशत तक रोगी बढ़ जाते हैं। जिन्हें एलर्जी की समस्या है उन्हें अस्थमा या निमोनिया हो जाता है। दूसरा, लगातार प्रदूषण में रहने से प्रतिरोधक क्षमता घटने से दूसरी संक्रामक बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। - डॉ. पराग शर्मा, सह प्राध्यापक, छाती एवं श्वास रोग विभाग, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल