चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसी मां-बेटी, आरक्षक ने बचाई जान; शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस से उतरने के दौरान हुआ हादसा
मां-बेटी हजरत निजामुद्दीन से भोपाल पहुंची थीं। ट्रेन चलने पर जल्दबाजी में उतरने की कोशिश के दौरान दोनों का पैर फिसल गया। जिससे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 11:19:18 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 11:19:18 AM (IST)
स्टेशन पर लगे कैमरे में घटना रिकॉर्ड हो गई। सौ- रेलवेHighLights
- भोपाल स्टेशन पर शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस के रवाना होते समय हादसा
- मां और उसकी 15 वर्षीय बेटी ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गईं
- ड्यूटी पर तैनात मधुसूदन यादव ने दोनों को खींचकर सुरक्षित निकाला
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बेटी को बाथरूम से लौटने में देर हुई और ट्रेन चलने लगी। बेटी को अकेला छोड़ने के डर से मां भी उसके साथ उतरने की कोशिश करने लगी। लेकिन अगले ही पल दोनों की जान पर बन आई। मां-बेटी चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गईं। वहां मौजूद लोगों के लिए यह पल बेहद डरावना था।
इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के आरक्षक मधुसूदन यादव की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए दोनों को खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी तत्परता से मां-बेटी की जान बच गई।
बेटी को अकेला छोड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं मां
जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब 7:35 बजे ट्रेन नंबर 12156 शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से रवाना हो रही थी। इसी दौरान आरक्षक मधुसूदन यादव प्लेटफॉर्म नंबर-1 से 3 तक ए-3 और ए-5 बीट पर ड्यूटी करते हुए ट्रेन पास करा रहे थे।
तभी उनकी नजर पीछे की ओर लगे जनरल कोच के गेट से उतरने की कोशिश कर रही दो महिला यात्रियों पर पड़ी। दोनों ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसती जा रही थीं। स्थिति की गंभीरता समझते हुए आरक्षक ने तुरंत दोनों को बाहर खींच लिया।
बेटी बाथरूम से लौटी, तब तक चल पड़ी ट्रेन
महिला यात्री ने बताया कि वह अपनी 15 वर्षीय बेटी के साथ हजरत निजामुद्दीन से भोपाल आई थीं। सफर के दौरान बेटी बाथरूम गई थी। इसी बीच ट्रेन चलने लगी। मां ने बेटी के साथ उतरने की कोशिश की, लेकिन जल्दबाजी में उनका पैर फिसल गया और दोनों ट्रेन व प्लेटफॉर्म के बीच गिर गईं।
हादसे में मां-बेटी को मामूली चोटें आईं। दोनों ने प्राथमिक उपचार लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित स्टेशन परिसर से बाहर भेज दिया गया।
ट्रेन के नीचे जाने से पहले आरक्षक ने बचाई जान
चलती ट्रेन से उतरने की कोशिश ने मां-बेटी को बड़े हादसे के मुहाने पर पहुंचा दिया था। गनीमत रही कि समय रहते आरक्षक मधुसूदन यादव की नजर उन पर पड़ गई। उनकी सतर्कता और तत्परता से दोनों सुरक्षित बच गईं।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि चलती ट्रेन से उतरना या चढ़ना कितना खतरनाक हो सकता है। थोड़ी-सी जल्दबाजी यात्रियों और उनके परिवारों को जिंदगीभर का दर्द दे सकती है।